अयोध्या : राम मंदिर पर भूकंप-तूफान का नहीं होगा असर, रामभक्तों से मांगी जा रही हैं तांबे की पत्तियां

श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की बैठक में आरएसएस के सरकार्यवाह सुरेश जोशी उर्फ भैया जी और संघ के सह सरकार्यवाह श्री कृष्णगोपाल भी मौजूद रहे.

अयोध्या : राम मंदिर पर भूकंप-तूफान का नहीं होगा असर, रामभक्तों से मांगी जा रही हैं तांबे की पत्तियां

राम मंदिर के निर्माण की कवायद तेज (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली:

राम मंदिर भूमि पूजन के बाद राम मंदिर निर्माण की कवायद तेज कर दी गई है. इसी सिलसिले में गुरुवार को बैठक आयोजित की गई. बैठक में चंपत राय, नृपेंद्र मिश्र, गोविंद देव गिरी समेत आईआईटी मद्रास, सीबीआरआई, एल एंड टी के अधिकारियों समेत कुल 10 लोग मौजूद रहे. 36-40 महीने में मंदिर निर्माण कार्य पूरा होने तक प्रोग्रेस रिपोर्ट के लिए अब डे टू डे मीटिंग हुआ करेगी. आज की बैठक में मंदिर में किए गए विस्तार पर चर्चा हुई. खास तौर पर मंदिर में बढ़ाए गए गुम्बदों की संख्या और शिखर की ऊंचाई पर आने वाले खर्च और लगने वाले समय पर विचार हुआ. साथ ही कम से कम समय मे मुख्य मंदिर का निर्माण कैसे हो सकता है और क्या बदलाव किया जा सकता है. इस पर चर्चा हुई. यह बैठक दिल्ली के नेहरू मेमोरियल लाइब्रेरी में चल रही थी. 

श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की बैठक में आरएसएस के सरकार्यवाह सुरेश जोशी उर्फ भैया जी और संघ के सह सरकार्यवाह श्री कृष्णगोपाल भी मौजूद रहे. मंदिर निर्माण के क्रम में देश के 10 करोड़ घरों तक पहुंचने की योजना बनाई गई. निर्माण में 10 करोड़ परिवारों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष जुड़ाव की कोशिश की जाएगी. 

ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने कहा कि "हां, आज संघ के लोगों को इसलिए बुलाया था ताकि उनको ये पता रहे कि निर्माण के क्षेत्र में क्या चल रहा है. मंदिर निर्माण के लिए संघ की भूमिका को कोई कैसे नजरअंदाज कर सकता है. देश के लोगों के मन में मंदिर के लिए भूख किसने जगाई आपको मालूम होना चाहिए. अशोक सिंघल जी तो महज एक फेस थे." 

श्री रामजन्मभूमि मन्दिर का निर्माण भारत की प्राचीन निर्माण पद्धति से किया जा रहा है ताकि वह सहस्त्रों वर्षों तक न केवल खड़ा रहे, अपितु भूकम्प, झंझावात अथवा अन्य किसी प्रकार की आपदा में भी उसे किसी प्रकार की क्षति न हो. मन्दिर के निर्माण में लोहे का प्रयोग नहीं किया जाएगा. मन्दिर निर्माण में लगने वाले पत्थरों को जोड़ने के लिए तांबे की पत्तियों का उपयोग किया जाएगा. निर्माण कार्य हेतु 18 इंच लम्बी, 3 mm गहरी और 30 mm चौड़ी 10,000 पत्तियों की आवश्यकता पड़ेगी. 


श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने श्रीरामभक्तों से आह्वान किया है कि तांबे की पत्तियां दान करें. इन तांबे की पत्तियों पर दानकर्ता अपने परिवार, क्षेत्र अथवा मंदिरों का नाम गुदवा सकते हैं. इस प्रकार से ये तांबे की पत्तियां न केवल देश की एकात्मता का अभूतपूर्व उदाहरण बनेंगी, अपितु मन्दिर निर्माण में सम्पूर्ण राष्ट्र के योगदान का प्रमाण भी देंगी. 

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