
उत्तर प्रदेश में फतेहपुर ज़िले के किसान श्याम लाल ने बैंक ऑफ बड़ौदा से 90,000 हज़ार का कर्ज़ लेकर आलू की फसल लगाई थी। बेटी की शादी 9 मई को तय थी। उम्मीद थी कि फसल अच्छी होगी तो कर्ज़ चुकाना आसान होगा और बेटी की शादी भी अच्छे से कर पाएंगे। लेकिन बे-मौसम ओले गिरने और भारी बारिश से आलू की फसल बर्बाद हो गयी। श्याम लाल इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सके।
उनकी मा घुरी देवी के मुताबिक, "वो फसल बर्बाद हो जाने से बेहद परेशान था और बेटी की शादी की चिंता में डूबा रहता था। आज जब वो तनाव में बहू को खेतों में बर्बाद पड़ी फसल के बारे में बता रहा था, तभी अचानक बात करते करते ज़मीन पर गिर गया और उसकी मौत हो गयी।"
मृतक किसान की पत्नी के मुताबिक बैंक से नब्बे हज़ार का कर्ज़ लेकर आलू की फसल लगाई थी। बेटी की शादी 9 मई को थी और वो बेहद तनाव में रहने लगे थे। और नुकसान का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सके।
दरअसल ओलों और बेमौसम बरसात के कहर का दायरा काफी बड़ा है और उत्तर प्रदेश के 26 ज़िलों में किसानों की 50 फीसदी से ज़्यादा फसल बर्बाद होने की खबर है। बुंदेलखंड समेत राज्य के कई दूसरे इलाकों में किसान खुदकुशी कर चुके हैं।
कृषि राज्यमंत्री संजीव बालयान, जो रविवार को ही बुंदेलखंड के प्रभावित इलाकों का दौरा करके आए हैं, ने एनडीटीवी से कहा कि सभी प्रभावित किसानों को मुआवज़ा नहीं मिल पाया है। उन्होंने ये भी बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों की आत्महत्या पर अब तक कोई रिपोर्ट कृषि मंत्रालय के पास नहीं भेजी है।
इस बीच केन्द्र ने राज्यों को सलाह दी है वो राज्य आपदा राहत फंड से फौरन पीड़ित किसानों को राहत देना शुरू करें...