
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) ने पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक संघर्ष (Ladakh Clash) में जान गंवाने वाले सेना के जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी वीरता को सराहा है. उनकी ओर से जारी ट्वीट में कहा गया है, ''लद्दाख की गालवान घाटी में अपना जीवन न्योछावर करने वाले जवानों ने भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वश्रेष्ठ परंपराओं को बरकरार रखा है. उनकी वीरता राष्ट्र की स्मृति में सदा रहेगी. उनके परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है.'' ट्वीट में आगे कहा गया है, ''सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में, मैं देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए हमारे सैनिकों के अनुकरणीय साहस और सर्वोच्च बलिदान को नमन करता हूं.''
All those who laid down their lives in Galwan valley of Ladakh have upheld the best traditions of the Indian armed forces. Their valour will be eternally etched in the memory of the nation. My deepest condolences to their families.
— President of India (@rashtrapatibhvn) June 17, 2020
देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा में, लद्दाख की गलवान वैली में हमारे सैनिकों के अदम्य साहस और बलिदान को मैं, सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में, नमन करता हूं।
— President of India (@rashtrapatibhvn) June 17, 2020
गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में भारतीय सेना के एक कर्नल सहित 20 सैन्यकर्मी शहीद हो गए थे. झड़प में चीनी पक्ष के करीब 45 सैनिकों की मौत की खबर है. जानकारी के अनुसार, लद्दाख में हिंसक झड़प उस समय शुरू हुइ जब भारतीय सैनिक सीमा के भारत की तरफ चीनी सैनिकों द्वारा लगाए गए टेंट को हटाने गए थे. चीन ने 6 जून को दोनों पक्षों के लेफ्टिनेंट जनरल-रैंक के अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद इस टेंट को हटाने पर सहमति जताई थी. सूत्रों ने कहा कि चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय कर्नल बीएल संतोष बाबू को निशाना बनाने के बाद एक शारीरिक संघर्ष छिड़ गया और दोनों पक्षों के बीच डंडों, पत्थरों और रॉड का जमकर इस्तेमाल हुआ था.
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