पतंजलि की कोरोना की दवा Coronil को बाहर एक्सपोर्ट करने की भी तैयारी, ऐसे हुआ था ट्रायल

पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमुख डॉ अनुराग वार्ष्णेय ने कहा कि Coronil के लिए CoPP सर्टिफिकेशन मिला है. उन्होंने दवा के ट्रायल, सर्टिफिकेशन और आगे की योजना पर कई अहम जानकारियां दीं.

पतंजलि की कोरोना की दवा Coronil को बाहर एक्सपोर्ट करने की भी तैयारी, ऐसे हुआ था ट्रायल

बाबा रामदेव ने शुक्रवार को कहा- Coronil एविडेंस और रिसर्च के आधार पर बनाई. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

पतंजलि आयुर्वेद ने शुक्रवार को कोरोनावायरस के खिलाफ अपनी दवाई CORONIL को फिर से एंडोर्स किया है. स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य अधिकारियों की उपस्थिति में बाबा रामदेव ने अपनी दवाई पर रिसर्च बुक लॉन्च की है. उन्होंने कहा कि इस दवा को रिसर्च और एविडेंस के साथ बनाया गया है और इस आयुर्वेदिक दवाई की प्रभावकारिता को लेकर अब प्रमाण भी हैं.

कोरोनिल के सर्टिफिकेशन पर और जानकारी देते हुए पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमुख डॉ अनुराग वार्ष्णेय ने कहा कि Coronil के लिए CoPP सर्टिफिकेशन मिला है, जिसका मतलब होता है- सर्टिफिकेट फॉर फार्मास्यूटिकल प्रॉडक्ट. उन्होंने बताया कि 'इसका मतलब है कि अब यह ड्रग ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से मंजूरी पा चुका है और अब यह ड्रग दुनिया के 158 देशों में एक्सपोर्ट किया जा सकता है. आयुर्वेदिक ड्रग्स को CoPP अप्रूवल मिलना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन हमारे डॉक्यूमेंटेशन और रिसर्च ने मानकों को पूरा किया इसलिए हमें अप्रूवल मिली है.'

उन्होंने कहा, 'जो हमने क्लीनिकल ट्रायल कंडक्ट किया था NIMS राजस्थान में प्रोफेसर तोमर के नेतृत्व में, उस क्लीनिकल ट्रायल को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने इंटरनेशनल क्लिनिकल ट्रायल रजिस्ट्री में भी रजिस्टर किया है और आप वहां जाकर इसको देख सकते हैं. यानी हमारे पास उस ट्रायल का एंडोर्समेंट भी है.' वार्ष्णेय ने बताया कि यह स्टडी 'Phytomedicine' नाम के नामी जर्नल में पिछले हफ्ते ही पब्लिश की गई है.

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ट्रायल को लेकर उन्होंने बताया कि 'हमने CORONIL के कंपोनेंट्स से ट्रायल किया. अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी साथ में श्वासरी वटी और अंणु तेल का कॉम्बिनेशन बनाया और 100 ऐसे लोगों को दिया गया जो कोविड-19 संक्रमित थे. ये वो लोग थे जिनमें बहुत कम लक्षण थे या वो बिना लक्षण के मरीज थे लेकिन RT-PCR टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए थे.' उन्होंने बताया कि 50 मरीज़ों को प्लेसिबो दिया जो दिखने में इस दवाई की तरह ही था लेकिन दवाई नहीं था और 50 मरीजों को अपनी औषधि दी. जिनको औषधि दी गई थी वह सभी 7 दिन के अंदर पॉजिटिव से नेगेटिव हो गए, जबकि जिनको औषधि नहीं दी गई थी, 7 दिनों में उनमें से 60% लोग ही पॉजिटिव से नेगेटिव हो पाए.

उन्होंने बताया कि यह वाला ट्रायल खत्म हो चुका है लेकिन संस्था अलग-अलग तरह की मरीजों की आबादी में 4 ट्रायल और कर रही है और उनके नतीजे भी बहुत जल्द पेश कर दिए जाएंगे. रिसर्च इंस्टीट्यूट के हेड ने कहा कि दवाई बनाने की मंजूरी तो उनके पास पहले से थी लेकिन अब उन्होंने अपनी दवा के लिए और वैज्ञानिक दस्तावेज दिए हैं.

संस्था को दवाई के लिए स्टेट से लाइसेंस मिल चुका है. उन्होंने बताया कि 'स्टेट लाइसेंस अथॉरिटी उत्तराखंड ने हमें लाइसेंस दिया है और हमसे साफ कहा गया है कि ये कोविड-19 के सहायक इलाज के तौर इस्तेमाल किया जा सकता है. यह आयुष मंत्रालय की तरफ़ से ही दिया गया है. हम इस औषधि का एक्सपोर्ट शुरू कर रहे हैं. फिलहाल डॉक्यूमेंटेशन का काम पूरा हो गया है और बहुत जल्द एक्सपोर्ट करना शुरू कर देंगे.'


उन्होंने कहा कि 'पहले और अब में बहुत ज्यादा अंतर नहीं आएगा लेकिन अब बात यह है कि हमारे पास एक मजबूत डाटा है, और बहुत मजबूत पब्लिकेशन है जो यह साबित करते हैं कि यह औषधि प्रमाणित है.'

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