बड़े सपने पूरे करने के लिए दर्द से गुजरना पड़ता है : मशहूर शेफ विकास खन्ना ने NDTV से खास बातचीत में कहा

अमेरिका (America) में मिशलिन स्टार शेफ (Mishlin Star chef) अवार्ड से सम्मानित विकास खन्ना (50 ) के जीवन की कहानी प्रेरणा से भरपूर है. उनकी पुस्तक 'बरकत' 27 दिसंबर को रिलीज हो रही है जिसमें उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों को चित्रित किया है.

नई दिल्ली:

 विकास खन्ना (Vikas Khanna) आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. अमेरिका (America) में मिशलिन स्टार शेफ (Michelin Star chef) अवार्ड से सम्मानित विकास खन्ना (50 ) के जीवन की कहानी प्रेरणा से भरपूर है. उनकी पुस्तक 'बरकत' 27 दिसंबर को रिलीज हो रही है जिसमें उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों को चित्रित किया है. न्यूयॉर्क से एनडीटीवी से खास बातचीत में विकास खन्ना ने कहा कि खुद को आप साबित करना चाहते हैं तो दर्द से गुजरना होगा. जख्म आपके आगे बढ़ने का रास्ता हैं. आराम से इस जीवन में कुछ नहीं मिलता और जो आराम से मिले उसकी कद्र नहीं होती.

इस बातचीत में विकास खन्ना ने अपने जीवन के शुरुआती दिनों के संघर्ष से लेकर अपनी सफलता की पूरी कहानी बताई. उन्होंने कहा कि जिनके बड़े सपने हैं उनके साथ दुनिया कुछ निष्ठुर सी हो जाती है. विकास ने कहा, ''जब आप संघर्ष कर रहे होते हैं, दुनिया आपके साथ नहीं खड़ी दिखेगी. दुनिया कभी-कभी बड़ी अनकाईंड हो जाती है. लेकिन एक बात सच है कि परिवार से बड़ी कोई सपोर्ट नहीं होती. विकास खन्ना अपनी पुस्तक के जरिये अपने अनुभव, संघर्ष और सफलता को दूसरों के साथ बांटने के लिए  तैयार हैं और उनकी किताब आई है 'बरकत' जो जल्द ही रिलीज होने वाली है. NDTV से बातचीत में विकास ने कहा, 'ज़िंदगी में एक चीज तय कि यदि आपने सपने बड़े हों तो आपको दर्द से जूझना होगा.'

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विकास की ज़िंदगी के अनिभावों  का ही असर था कि वे रमजान में एक दिन रोज़ा  रखते हैं. उन्होंने कहा, 'मेरी पैदाइश अमृतसर की है. अमृतसर एक फूड कैपिटल है. पंजाब की लंगर प्रथा से मैं बहुत प्रभावित रहा हूं.' विकास ने कहा कि
उडूपी में मनीपाल कालेज में गया तो उसका उनकी ज़िंदगी पर ख़ासा प्रभाव रहा. उन्होंने कहा, ''उसका प्रभाव मेरी ज़िंदगी में सबसे ज्यादा ज्यादा है.'' नेपाल, आगरा, दिल्ली और कोलकाता में भी विकास ने काम किया. साउथ में रहे तो चेन्नई जाना शुरू किया.

बदलते दौर के बारे में विकास ने कहा, ''हम उस समय बड़े हुए जब इंटरनेट नहीं था, उसके बाद मुंबई में जॉब की और फिर वापस अमृतसर गया अपना वेंक्वेट हॉल संभालने के लिए. गोइंद वाल गया वहां किसी ज़माने में अकबार आया था. एक बार अकबर वहां गया और उसने लंगर चखा और दूसरों से इसके बारे में पूछा. फिर अकबर ने पूछा कि गुरू कौन हैं तो उनके बारे में उसे बताया गया कि गुरू खाना सर्व कर रहे हैं. तो इस (लंगर) का लोगों के जीवन में काफी प्रभाव रहा है. बड़े लोगों की डोनेशंस रहीं इसमें. ये (लंगर) अमृतसर का सबसे खास बात है. पहले सेवा करो, ये सिखों की खास बात है.'

विकास ने बताया कि उन्होंने 1993 में उन्होंने पहला रोज़ा रखा तबसे ये प्रथा चली आ रही है उनके जीवन में. विकास ने बताया, ''बाम्बे में जब नौकरी कर रहा था तब ट्रेनी था, तो ज्यादा काम नहीं करने देते थे. बॉम्बे में 1992 में दंगे हो गए थे तो हमें कहा कि अब आप बनाओगे खाना. आपको खाना बनाने का मौका नहीं मिलता लेकिन फिर मिला. जब कुक की तरह काम कर रहा था तो कोई आया और उसने बताया कि घाटकोपर में दंगे हो गए हैं, तो मैं बहुत परेशान हो गया. मैंने अपने मैनेजर को कहा कि मेरे भाई की जान खतरे में है.'' 
 

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उन्होंने बताया कि इसलिए उन्होंने होटल छोड़ दिया. विकास ने आगे बताया, ''मैनेजर ने कहा कि छोड़कर जाओगे तो सार्टिफिकेट नहीं मिलेगा. लेकिन मैं चला गया तो मुझे सर्टिफिकेट नहीं मिला. जब में घाटकोपर गया तो एक आदमी ने मुझे वहां चल रही समस्या से बचाया. जिसने मुझे बचाया वहां एक महिला को मैंने कहा कि मुझे शैफ बनना है. यह शुरुआत थी मेरे सफर की. पापा ने कहा था कि दुनिया गोल है. यह सही है हम घूम फिरकर वहीं पहुंच जाते हैं.''

विकास ने कहा, ''पापा ने बताया कि दादी ने भी पार्टीशन के समय मुस्लिम लड़कियों की मदद की थी. यही वह समय था जब मैंने रोज़ा रखने का फैसला किया.'' अपने न्यूयॉर्क जाने को लेकर विकास ने कहा, ''मैं न्यूयॉर्क किसी योजना के साथ   नहीं गया था. काम करने ही गया था. वैसे 9/11 के बाद अमेरिका बदल गया है. वहां ट्रेवेका में सात आठ लड़के एक साथ रहते थे. रेस्त्रां में काम करते थे और इनमें ज्यादातर पंजाबी थे. दिसंबर 24 को मैं जब 'डेली' पहुंचा तो लिखा था कि डेली छुट्टियों के लिए बंद है. मुझे ये बात पता नहीं थी. मुझे लगने लगा कि इस शहर में मेरा कुछ नहीं होगा. ऐसे ही समय में मुझे पापा की बात याद आई जिन्होंने कहा था कि वापस आ जा. अभिभावक बच्चों की चिंता करते हैं. यह अच्छी बात है.''

उन्होंने कहा कि, ''घटनाओं से ज़िंदगी नहीं बदलती. डेली के बंद होने की बात जानने के बाद एक लम्बी लाइन में खड़ा हो गया. वहां खान मिल रहा था वह एक शेल्टर था. वहां एक लंबी लाइन थी वहां एक शेल्टर था, उनके लिए जिनके पास घर नहीं था. तो मुझे वो गोल्डन टेंपल जैसा लगा और कुछ समय बाद में वापस आ गया.''

किताब के बारे में विकास ने बताया कि यह उनकी ज़िंदगी पर आधारित है. अब यह 27 दिसंबर को लॉन्च हो रही है.

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शेफ विकास खन्ना ने लिखी नई किताब, 27 दिसंबर को होगी लॉन्च