मुंबई से ट्रांसफर होकर दिल्ली आई प्रज्ञा पंड्या की परेशानी उनके चेहरे से ही झलकती है। सुप्रीम कोर्ट ने नर्सरी दाखिले पर रोक क्या लगाई, प्रज्ञा की आंखें भर आईं। उन्हें लगा शायद अब उनके तीन साल के बच्चे को नर्सरी में दाखिला मिल सकेगा।
प्रज्ञा और उनके जैसे कुछ अभिभावकों ने 3 अप्रैल के दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की थी, जिसमें ट्रांसफर केस को छोड़कर बाकी कैटेगरी के बच्चों के नर्सरी में दाखिले को हरी झंडी दी गई थी। यानी अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने तक नर्सरी दाखिलों पर रोक रहेगी।
भरी आंखों से प्रज्ञा बताती हैं कि वह पिछले साल ट्रांसफर होकर मुंबई से दिल्ली आईं, उस वक्त उनका बच्चा नर्सरी में पढ़ रहा था। दिल्ली में आई तो सरकार ने ट्रांसफर केस के पांच प्वाइंट देने की घोषणा की, लेकिन बाद में हाईकोर्ट में सरकार ने ये प्वाइंट खत्म करने की घोषणा कर दी और बताया कि ट्रासंफर केस की जांच में ज्यादातर मामले फर्जी पाए गए हैं। उनकी अर्जी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने भी 16 अप्रैल को सुनवाई की तारीख दी।
प्रज्ञा का कहना है, ऐसे तो उनके बच्चों को दाखिला ही नहीं मिलेगा... अगर कुछ केस फर्जी हैं, तो उन्हें सजा दी जानी चाहिए, लेकिन इस मामले में उनके तीन साल के बच्चे का क्या कसूर है। गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट में 18 दिसम्बर, 2013 को नर्सरी दाखिलों के संबंध में जारी की गई उपराज्यपाल की गाइडलाइंस को लेकर कई अर्जियों पर सुनवाई चल रही हैं।
हालांकि 3 अप्रैल को हाईकोर्ट ने अपने आदेश में 27 फरवरी से पहले हुए ड्रॉ के आधार पर ही दाखिले शुरू करने के आदेश दिए थे, जिसके आधार पर दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों से 15 अप्रैल से क्लास शुरू करने के निर्देश भी जारी कर दिए। लेकिन हाईकोर्ट ने ट्रांसफर वाले केस की याचिका की सुनवाई 16 अप्रैल को तय की जिसके बाद अभिभावक सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। सुप्रीम कोर्ट ने इन लोगों को बड़ी राहत देते हुए हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है, लेकिन एडमिशन के लिए लोगों को अभी इंतजार करना होगा।
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