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This Article is From Mar 28, 2015

मंत्रियों की सम्पत्ति गुलदस्ते में क्यों? RTI पर अटकी महाराष्ट्र सरकार

मंत्रियों की सम्पत्ति गुलदस्ते में क्यों? RTI पर अटकी महाराष्ट्र सरकार
मुंबई:

महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार के मंत्रियों पर उंगली उठी है। उनके संपत्ती के खुलासे न होने से यह पूछा जा रहा है की आखिर मंत्रीजी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं कर रहें? RTI कानून के तहत दायर अर्जी से यह सवाल उभरा है।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने अपनी अर्जी में पूछा था कि क्या महाराष्ट्र सरकार के मंत्रियो ने अपनी संपत्ति को सार्वजनिक किया है? इस अर्जी के जवाब में मिला जवाब बताता है की राज्य के किसी भी मंत्री ने अभी तक अपनी संपत्ति की सूचना नहीं दी है। इस जवाब के बाद गलगली ने मुख्यमंत्री कार्यालय को एक ख़त लिखकर गुजारिश की है कि, मंत्री अपनी संपत्ति की सूचना को जल्द सार्वजनिक करें।

अनिल गलगली ने एनडीटीवी इंडिया से बात करते हुए कहा कि, उनके ख़त को भेजे हुए 100 से अधिक दिन हो चुके हैं। लेकिन, अभीतक कोई जवाब नहीं मिला है। वे याद दिलाना चाहते हैं कि मौजूदा केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को लिखित में कहा है कि मंत्री अपनी संपत्ति से जुड़ी सूचना सार्वजनिक करें।

महाराष्ट्र की सरकार में बीजेपी के 20 और शिवसेना के 10 मंत्री हैं। सरकार कह रही है कि सभी ने बतौर उम्मीदवार चुनाव आयोग के पास अपनी संपत्ति का ब्यौरा हाल ही में दिया है। ऐसे में मंत्री बनने पर इस सूचना को सार्वजनिक करना अनिवार्य नहीं है।

राज्य के मुखिया देवेन्द्र फडणवीस ने एनडीटीवी इण्डिया से बात करते हुए कहा कि, सुप्रीम कोर्ट ने 2008 में ही एक आदेश में कह दिया है कि किसी मंत्री को अपनी सम्पति की सूचना को सार्वजनिक करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यह सूचना उन्हें राज्य के मुख्य सचिव ने दी है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि, संपत्ति को सार्वजनिक करने के लिए 31 अगस्त तक का समय है। ऐसे में हम जानबूझ कर सूचना नहीं दे रहें, यह आरोप लगाना उचित नहीं। और भले ही यह सूचना देना अनिवार्य नहीं होगा। तब भी हम सूचना जल्द सार्वजनिक करेंगे।

मंत्रियों की सम्पति सार्वजनिक करने का मामला पुरानी सरकार के समय से चला आ रहा है। अहम बात है ये कि इससे पहले की कांग्रेस-एनसीपी सरकार के मंत्रियों ने भी अपनी संपत्ति ऑनलाइन उपलब्ध नहीं करायी थी। वैसे, खुद की संपत्ति सार्वजनिक करने की बात पर देश के कई राज्यों की मंत्री परिषद में भी एक राय नहीं बन सकी है।

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