
पटना:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आलोचना किए जाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को कहा कि आरएसएस की प्रतिक्रिया पर जवाब देने की दरकार नहीं है, क्योंकि यह पहले भी होता आया है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘जदयू का आरएसएस के साथ कोई संबंध नहीं है। पार्टी ने भाजपा के साथ समझौता किया है। संघ पहले भी मेरी आलोचना करता आया है और उसकी प्रतिक्रिया का जवाब देने की जरूरत नहीं है। भाजपा ने कुछ कहा होता तो उस पर प्रतिक्रिया देने का सवाल उठता।’’ संवाददाताओं ने नीतीश कुमार से आरएसएस के मुखपत्र ‘पांचजन्य’ में उनके खिलाफ लिखे गये एमजी वैद्य के आलेख के बारे में प्रश्न पूछा था।
उन्होंने कहा, ‘‘संघ पहले भी मेरी आलोचना कर चुका है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। 2004 में मैने जब कहा था कि धर्म बदलने से जाति नहीं बदलती टिप्पणी की थी और दलित इसाई और मुस्लिम का समर्थन किया, तब भी संघ ने मेरे खिलाफ लिखा था।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के साथ जदयू का गठजोड कुछ बुनियादी उसूलों पर हुआ है। समान नागरिक संहिता नहीं थोपने, अनुच्छेद 370 को नहीं समाप्त करने और अयोध्या मसला को अदालत या आपसी रजामंदी से लेकर हल करने की बुनियादी शर्तो पर यह समझौता हुआ था। जारी
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘जदयू का आरएसएस के साथ कोई संबंध नहीं है। पार्टी ने भाजपा के साथ समझौता किया है। संघ पहले भी मेरी आलोचना करता आया है और उसकी प्रतिक्रिया का जवाब देने की जरूरत नहीं है। भाजपा ने कुछ कहा होता तो उस पर प्रतिक्रिया देने का सवाल उठता।’’ संवाददाताओं ने नीतीश कुमार से आरएसएस के मुखपत्र ‘पांचजन्य’ में उनके खिलाफ लिखे गये एमजी वैद्य के आलेख के बारे में प्रश्न पूछा था।
उन्होंने कहा, ‘‘संघ पहले भी मेरी आलोचना कर चुका है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। 2004 में मैने जब कहा था कि धर्म बदलने से जाति नहीं बदलती टिप्पणी की थी और दलित इसाई और मुस्लिम का समर्थन किया, तब भी संघ ने मेरे खिलाफ लिखा था।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के साथ जदयू का गठजोड कुछ बुनियादी उसूलों पर हुआ है। समान नागरिक संहिता नहीं थोपने, अनुच्छेद 370 को नहीं समाप्त करने और अयोध्या मसला को अदालत या आपसी रजामंदी से लेकर हल करने की बुनियादी शर्तो पर यह समझौता हुआ था। जारी
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