
मुंबई:
आयकर विभाग ने भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन गडकरी की कंपनी पूर्ति शुगर एंड पॉवर में निवेश करने वाली कंपनियों के परिसरों की जांच-पड़ताल की। जांच में पाया गया कि सुरक्षा गार्ड और श्रमिकों तक को इन कंपनियों में निदेशक बनाया गया।
आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमने मुंबई, पुणे, नागपुर तथा कोलकाता में 12 जगहों की जांच की है।’
विभाग के सूत्रों के अनुसार अबतक मुंबई में 13 से अधिक लोगों का बयान लिया गया है। ये वे लोग हैं जिनका नाम इन कंपनियों में बतौर निदेशक हैं।
सूत्रों के अनुसार, ‘निदेशकों में जिन लोगों का नाम है, उसमें सुरक्षा गार्ड, श्रमिक तथा ज्योतिषी हैं। उनमें से कइयों ने दावा किया कि वे नहीं जानते कि उनका नाम बतौर निदेशक कैसे आया।’
सूत्रों ने कहा, ‘इन कंपनियों को 2,000 से 3,000 रुपये का चुकता पूंजी के साथ शुरू किया गया लेकिन बाद में इन कंपनियों में बड़ी राशि डाली गई।’ सूत्रों ने उन इकाइयों का नाम नहीं बताया जिसके परिसरों की तलाशी ली गई है।
आयकर अधिकारियों ने विभिन्न स्थानों पर पाया कि दफ्तरों को ऐसा रूप दिया गया जिससे लगे कि वह कंपनी पंजीयक के पास पंजीकृत कंपनी के रूप में दिखे।
सूत्रों के अनुसार कि ऐसा लगता है कि चालाकी से धन प्राप्त करने के लिए निष्क्रिय कंपनियां बनाई गईं।
सूत्रों ने कहा कि अगर कंपनियां कोष का स्रोत नहीं बता पाती हैं तो इसे कर चोरी माना जाएगा और उसके मुताबिक उन्हें दंडित किया जाएगा।
आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमने मुंबई, पुणे, नागपुर तथा कोलकाता में 12 जगहों की जांच की है।’
विभाग के सूत्रों के अनुसार अबतक मुंबई में 13 से अधिक लोगों का बयान लिया गया है। ये वे लोग हैं जिनका नाम इन कंपनियों में बतौर निदेशक हैं।
सूत्रों के अनुसार, ‘निदेशकों में जिन लोगों का नाम है, उसमें सुरक्षा गार्ड, श्रमिक तथा ज्योतिषी हैं। उनमें से कइयों ने दावा किया कि वे नहीं जानते कि उनका नाम बतौर निदेशक कैसे आया।’
सूत्रों ने कहा, ‘इन कंपनियों को 2,000 से 3,000 रुपये का चुकता पूंजी के साथ शुरू किया गया लेकिन बाद में इन कंपनियों में बड़ी राशि डाली गई।’ सूत्रों ने उन इकाइयों का नाम नहीं बताया जिसके परिसरों की तलाशी ली गई है।
आयकर अधिकारियों ने विभिन्न स्थानों पर पाया कि दफ्तरों को ऐसा रूप दिया गया जिससे लगे कि वह कंपनी पंजीयक के पास पंजीकृत कंपनी के रूप में दिखे।
सूत्रों के अनुसार कि ऐसा लगता है कि चालाकी से धन प्राप्त करने के लिए निष्क्रिय कंपनियां बनाई गईं।
सूत्रों ने कहा कि अगर कंपनियां कोष का स्रोत नहीं बता पाती हैं तो इसे कर चोरी माना जाएगा और उसके मुताबिक उन्हें दंडित किया जाएगा।
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