एनडीटीवी से बात करते शर्मिष्ठा मुखर्जी
आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव में दिल्ली में 15 साल तक राज करने वाली कांग्रेस की हालत कोई अच्छी नहीं मानी जा रही, लेकिन ऐसे समय में पार्टी में हो रही एक नई एंट्री पर सबकी नज़र लगी हुई है। यह एंट्री है राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी की।
शर्मिष्ठा ने दिल्ली की ग्रेटर कैलाश सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस पार्टी से टिकट मांगा है। शर्मिष्ठा का कहना है कि वह सालों से ग्रेटर कैलाश इलाके में रही हैं और उनको इलाके की समस्या का भी अंदाज़ा है। साथ ही ग्रेटर कैलाश सीट के अंतर्गत आने वाले सीआर पार्क इलाके में बंगाली लोग अच्छी संख्या में हैं इसलिए वह इसी सीट से चुनाव लड़ने के पक्ष में हैं।
सीआर पार्क में सुबह की सैर के दौरान प्रचार में जुटी शर्मिष्ठा से जब एनडीटीवी-इंडिया ने पूछा कि वह राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी हैं और इसलिए एक बड़ा नाम हैं तो आखिर क्यों वह किसी बड़े या नामी विरोधी उम्मीदवार के खिलाफ़ नहीं लड़ना चाहती और सुरक्षित सीट ढूंढ़ रही हैं, शर्मिष्ठा ने कहा कि राजनीति कोई अहम की लड़ाई नहीं या फिर कुश्ती का अखाड़ा नहीं। हर पार्टी अपनी रणनीति बनाती है जिसके हिसाब से वह उम्मीदवार उतारती है और कांग्रेस की रणनीति है कि कैसे सीटों की संख्या बढ़ाई जाए।
शर्मिष्ठा ने इस बात पर भी आपत्ति की कि हम उनको राष्ट्रपति की बेटी कहकर संबोधित ना करें बल्कि प्रणब मुखर्जी की बेटी कहें।
शर्मिष्ठा से पूछा गया कि आपके पिता पुराने कांग्रेसी हैं, राष्ट्रपति हैं और उनके भाई सांसद हैं तो ऐसे में परिवारवाद का आरोप तो लगेगा। शर्मिष्ठा ने कहा कि हर नागरिक को वहट करने और चुनाव लड़ने का हक है तो मुझे क्यों उससे वंचित किया जाए? क्योंकि मैं एक राजनैतिक परिवार से हूं इसलिए? और परिवारवाद कहा नहीं हैं डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बनता है, वकील का बेटा वकील और कलाकार का बेटा कलाकार, ये बात सही है कि राजनैतिक परिवार से होने पर फायदा मिलता है, लेकिन वह फायदा शुरू में मिलता है, लेकिन अगर आप काम करके नहीं दिखा सकते तो फिर आपको कोई स्वीकार नहीं करता।
बहरहाल राष्ट्रपति की बेटी की पहचान से शर्मिष्ठा मुखर्जी एक बड़ा नाम हैं, लेकिन इलाके के लोगों ने बताया कि कांग्रेस के लिए समय मुश्किल है।
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