महाराष्ट्र में कोरोना से मार्च की तुलना में अप्रैल के 12 दिनों में 33 प्रतिशत ज्यादा मौतें

महाराष्ट्र में हालात बिगड़े- ऑटोरिक्शे में मरीज़ को दी ऑक्सीजन, बेड ना मिलने पर गाड़ी में मरीज़ की मौत, दाह संस्कार के लिए शवों की वेटिंग, अस्पताल में ज़मीन पर लिटाकर मरीज़ों का इलाज

महाराष्ट्र में कोरोना से मार्च की तुलना में अप्रैल के 12 दिनों में 33 प्रतिशत ज्यादा मौतें

कोरोना संक्रमित महिला को ऑटोरिक्शे में ऑक्सीजन दी गई.

मुंबई:

Maharashtra Coronavirus: कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के कारण मार्च की तुलना में इस महीने मुंबई में मौतें 68% बढ़ी हैं तो महाराष्ट्र में 33%. महाराष्ट्र में मौत और किल्लतों की भयावह तस्वीर रोज़ाना आ रही है. होम आइसोलेशन वाले मरीज़ गंभीर हालत में अस्पताल पहुंच रहे हैं जहां आईसीयू-वेंटिलेटर की क़िल्लत है. एक्सपर्ट कहते हैं कि ये कहना ग़लत है कि 2021 का वायरस घातक नहीं है. 

अहमदनगर में बेड नहीं मिलने पर गाड़ी में एक मरीज की मौत हो गई. शमशान भूमि में दाह संस्कार के लिए शवों की वेटिंग चल रही है. ऑटो रिक्शे में बिठाकर ऑक्सीजन देने की तस्वीर वायरल हो गई है. बीड में ज़मीन पर मरीज़ों का इलाज हो रहा है. ज़मीन पर ही लकीरें खींचकर मरीज़ों का इलाज करने को स्वास्थ्यकर्मी मजबूर हैं. महाराष्ट्र से रोज़ाना सामने आ रही ऐसी तस्वीरें भयावह हालात बयां करती हैं.


यह दलील कि अब वायरस सिर्फ़ तेज़ी से फैलता है, लेकिन घातक नहीं, कमज़ोर पड़ रही है. महाराष्ट्र ने मार्च महीने में 2,495 कोविड मौतें देखीं थीं जबकि अप्रैल के 12 दिनों में ही 3,317 मौतें हो चुकी हैं. मार्च की तुलना में 33% ज़्यादा मौतें हुई हैं. मुंबई ने मार्च में 212 मौतें दर्ज कीं अब अप्रैल में सिर्फ़ 12 दिनों में 356 मौतें शहर देख चुका है. यानी मार्च की तुलना में मौतें क़रीब 68% बढ़ी हैं. महाराष्ट्र में मृत्यु दर 1.68% है तो मुंबई शहर में डेथ रेट 2.28% है.

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जानकारों के मुताबिक कम मृत्यु दर का कारण मरीज़ों में जागरूकता और बेहतर ट्रीटमेंट हैं लेकिन वायरस पिछली बार जितना ही घातक है.