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This Article is From Aug 06, 2020

मध्‍यप्रदेश: साहूकारी कर्ज से परेशान किसान ने कथित तौर पर फांसी लगाई, सुसाइड नोट में है कर्ज का जिक्र

दिनेश के छोटे भाई सुजीत परमार ने कहा कि कर्जे को लेकर वे परेशान थे, बार बार फोन आता था, दो महीने पहले पापा शांत हुए, फिर भी इंदौर वाले का बार बार फोन आता था.

मध्‍यप्रदेश: साहूकारी कर्ज से परेशान किसान ने कथित तौर पर फांसी लगाई, सुसाइड नोट में है कर्ज का जिक्र
मृतक किसान के पास से मिले नोट में कर्ज का जिक्र है
भोपाल:

मध्यप्रदेश के बड़वानी में साहूकारी कर्ज से परेशान किसान ने कथित तौर पर कुंए में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, मृतक के पास से मिले नोट में कर्ज का जिक्र है. आवली गांव में 40 साल के दिनेश परमार ने फांसी लगाकर जान दे दी, लेकिन अपने सुसाइड नोट में बताकर गये कि कैसे साहूकार ने परेशान किया और 1 लाख 30 हजार के कर्ज के बदले ब्याज सहित 8 लाख रुपए वसूलने का दबाव बनाया, खेत बेचकर 3 लाख रुपये का उन्होंने भुगतान भी किया फिर भी जान से मारने की धमकी मिलती रही.

उनके छोटे भाई सुजीत परमार ने कहा कि कर्जे को लेकर वे परेशान थे, बार बार फोन आता था, दो महीने पहले पापा शांत हुए, फिर भी इंदौर वाले का बार बार फोन आता था. पुलिस ने सुसाइड नोट जब्त कर जांच शुरु कर दी है. बड़वानी के एसपी निमिष अग्रवाल ने बताया कि सुसाइड नोट पाया गया है कर्ज के लिये दो लोगों को परेशान करना बताया है हमने मामला दर्ज कर लिया है, साक्ष्य के अनुरूप कार्रवाई करेंगे. मामले में मृतक ने कलेक्टर से कार्रवाई की गुहार लगाई थी, जिले के कलेक्टर शिवराज सिंह वर्मा ने कहा उसने ये लिखा है जो मैंने पैसे लिये थे उससे ज्यादा दिया है, पूरी जांच शुरू कर दी. जब उनसे साहूकारी का सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा वो सब चेक करा रहे हैं साहूकारिता का लाइसेंस था या नहीं.

     
वैसे हाल ही में मध्यप्रदेश में साहूकारी संशोधन विधेयक एवं अनुसूचित जनजाति ऋण मुक्ति विधेयक 2020 को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है, जिसके तहत अनुसूचित क्षेत्रों में निवासरत अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों के लिये 15 अगस्त 2020 तक के सभी ऋण ब्याज सहित माफ किए जाने का प्रावधान किया जा रहा है, साथ ही अन्य वर्गों को भी साहूकारों के चंगुल से छुड़ाने के लिए मध्यप्रदेश साहूकार (संशोधन विधेयक 2020) लाया जा रहा है. बीजेपी सांसद गजेन्द्र पाटिल इस मामले में सरकार की तरफदारी करते हुए कहते हैं कि मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार साहूकारिता को लेकर नियम बना रही है, जल्दी ही यह धरातल पर होंगे.ये सभी किसानों के लिये कर्जे के कारण सरकार फैसला ले रही है.

उधर, कांग्रेस प्रवक्ता फिरोज सिद्दीकी ने कहा किसान अकेले नहीं, बाकी के लोग भी बेरोजगारी के कारण आत्महत्या कर रहे हैं, ना ही किसान को समर्थन मूल्य मिला.बिजली के बिल बढ़े आये किसानों की स्थिति दयनीय हो गई शिवराज का पुराना रिकॉर्ड है, पहले भी उनके राज में किसानों की आत्महत्या में प्रदेश नंबर वन था.ये हाल उस राज्य में हैं जहां वैसे तो हर साल 10000 से ज्यादा लोग सूदखोरी से प्रभावित होते हैं, लेकिन 2019 में विधानसभा में सरकार ने कहा थाराज्य में 3 साल में सूदखोरी के 144 प्रकरण दर्ज किए गए,जिसमें 60 लोगों ने आत्महत्या कर ली. 340 लोग आरोपी बनाये गये, जिसमें सिर्फ 3 मामलों में पांच दोषियों को सज़ा सुनाई. इन आंकड़ों को दिखाने के पीछे ये बताने की कोशिश है कि सरकार समस्या को समस्या माने तब तो हल निकले, दस हजार का आंकड़ा बहुत कमतर है लेकिन सरकार तो विधानसभा में कहती है सिर्फ 144 मामले वो भी 3 साल में सजा 5 लोगों को हुई. आप बना लीजिये कानून, लेकिन सज़ा मिले तब तो, साहूकारी प्रथा और उसका कुचक्र हकीकत है, ये भी सच है अगर इस हकीकत के किरदार सियासी होते हैं इसलिये उनका कुछ नहीं बिगड़ता.

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