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This Article is From Jun 16, 2011

लोकपाल विधेयक के दो मसौदे नहीं होंगे : मोइली

समाज के प्रतिनिधियों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को बाधित कर रही है।
नई दिल्ली: सरकार ने लोकपाल विधेयक पर समाज के प्रतिनिधियों के साथ तीखे मतभेदों के बीच गुरुवार को इस संभावना से इनकार कर दिया कि इस विधेयक के दो मसौदे केन्द्रीय कैबिनेट के समक्ष भेजे जाएंगे। समाज के प्रतिनिधियों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को बाधित कर रही है। कानून मंत्री एवं संयुक्त लोकपाल मसौदा समिति के संयोजक वीरप्पा मोइली ने कहा कि यदि 20 जून को होने वाली अगली बैठक में दोनों पक्षों के प्रतिनिधि आपसी मतभेदों को दूर नहीं कर पाये तो उनके विचारों को कैबिनेट के समक्ष भेजा जाएगा। उन्होंने कहा, लेकिन दो मसौदे नहीं होंगें उन्होंने समाज के प्रतिनिधि अरविन्द केजरीवाल के कल दिए गए बयान का विरोध करते हुए यह बात कही। केजरीलवाल ने कहा था कि सरकार के प्रतिनिधियों और समाज के प्रतिनिधियों द्वारा बनाए गए दो अलग अलग मसौदे कैबिनेट के समक्ष भेजे जाएंगे। समाज के प्रतिनिधियों पर मांगें बदलने का आरोप लगाते हुए मोइली ने कहा कि इससे मदद नहीं मिलेगी। हमें संयुक्त मसौदा समिति के आदेश तक खुद को सीमित रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने मजबूत लोकपाल विधेयक के लिए समाज के प्रतिनिधियों द्वारा रखे गये 40 में से 34 सिद्धांतों को मान लिया है। मोइली ने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून में प्रधानमंत्री को शामिल किये जाने के मुद्दे पर अभी अंतिम तौर पर कोई निर्णय नहीं किया गया है। कानून मंत्री ने कहा कि संप्रग भ्रष्टाचार को मिटने के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन भाजपा और समाज के सदस्य उसके प्रयासों में बाधाएं उत्पन्न कर रहे हैं। उन्होंने कहा, मेरी मंशा समाज और भाजपा सहित लोगों की भावना को आहत करने की नहीं है। वे भ्रष्टाचार के खिलाफ संप्रग की लड़ाई में अड़चनें डाल रहे हैं।
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