
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत (फाइल फोटो)
मुंबई:
किसानों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए कर्जमाफी की उपयोगिता को खारिज करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने इस कदम को उन्हें सिर्फ त्वरित और अविलंब राहत प्रदान करने के लिए सही बताया.
भागवत ने कहा, 'कर्जमाफी उन्हें (किसानों को) राहत पहुंचाने के लिए सही है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है. किसानों को उनके श्रम के अनुसार फसल का दाम मिलना चाहिए. उन्हें उनके कृषि उत्पाद का सही रिटर्न भी मिलना चाहिए.' भागवत ने कहा कि समय की मांग है कि समूचे कृषि क्षेत्र को सुचारू बनाया जाए, ताकि यह दीर्घावधि में लाभकारी हो.
किसानों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए कर्जमाफी की उपयोगिता को खारिज करने के भागवत के बयान पर कांग्रेस ने भाजपा और उसके वैचारिक मार्गदर्शक पर हमला करते हुए उन्हें 'किसान विरोधी' करार दिया. भागवत सोमवार की रात महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (एमएसीसीआईए) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर बोल रहे थे. इस कार्यक्रम में व्यापारियों और उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया.
संघ प्रमुख ने कहा, 'समय की मांग है कि समूचे कृषि क्षेत्र को सुचारू बनाया जाए ताकि इसे दीर्घावधि में लाभकारी बनाया जा सके. इस प्रक्रिया में व्यापारी वर्ग को उन्हें (किसानों को) अपना समर्थन देना चाहिए और उन्हें प्रौद्योगिकी और शोध का फायदा उठाने में उनकी मदद करनी चाहिए.'
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
भागवत ने कहा, 'कर्जमाफी उन्हें (किसानों को) राहत पहुंचाने के लिए सही है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है. किसानों को उनके श्रम के अनुसार फसल का दाम मिलना चाहिए. उन्हें उनके कृषि उत्पाद का सही रिटर्न भी मिलना चाहिए.' भागवत ने कहा कि समय की मांग है कि समूचे कृषि क्षेत्र को सुचारू बनाया जाए, ताकि यह दीर्घावधि में लाभकारी हो.
किसानों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए कर्जमाफी की उपयोगिता को खारिज करने के भागवत के बयान पर कांग्रेस ने भाजपा और उसके वैचारिक मार्गदर्शक पर हमला करते हुए उन्हें 'किसान विरोधी' करार दिया. भागवत सोमवार की रात महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (एमएसीसीआईए) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर बोल रहे थे. इस कार्यक्रम में व्यापारियों और उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया.
संघ प्रमुख ने कहा, 'समय की मांग है कि समूचे कृषि क्षेत्र को सुचारू बनाया जाए ताकि इसे दीर्घावधि में लाभकारी बनाया जा सके. इस प्रक्रिया में व्यापारी वर्ग को उन्हें (किसानों को) अपना समर्थन देना चाहिए और उन्हें प्रौद्योगिकी और शोध का फायदा उठाने में उनकी मदद करनी चाहिए.'
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