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This Article is From Sep 02, 2020

लोन मोरेटोरियम अवधि पर याचिकाकर्ता ने कहा- RBI चाहता है कि बैंक Covid में मुनाफा कमाएं

लोन मोरेटोरियम अवधि के मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि इस फैसले से लोन लेने वालों पर दोहरी मार पड़ रही है क्योंकि उनसे चक्रवृद्धि ब्याज यानी कंपाउंडिंग इंट्रस्ट लिया जा रहा है.

लोन मोरेटोरियम अवधि पर याचिकाकर्ता ने कहा- RBI चाहता है कि बैंक Covid में मुनाफा कमाएं
लोन मोरेटोरियम अवधि वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
नई दिल्ली:

लोन मोरेटोरियम अवधि (Loan Moratorium Period) के मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि इस फैसले से लोन लेने वालों पर दोहरी मार पड़ रही है क्योंकि उनसे चक्रवृद्धि ब्याज यानी कंपाउंडिंग इंट्रस्ट (Compounding Interest) लिया जा रहा है. याचिकाकर्ता ने कहा, 'यह योजना दोगुनी मार है क्योंकि वे हमें चक्रवृद्धि ब्याज चार्ज किया जा रहा है. ब्याज पर ब्याज वसूलने के लिए बैंक इसे डिफॉल्ट मान रहे हैं. यह हमारी ओर से डिफ़ॉल्ट नहीं है. सभी सेक्टर बैठ गए हैं लेकिन RBI चाहता है कि बैंक कोविड-19 के दौरान मुनाफा कमाए और यह अनसुना है.'

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया, 'RBI देश से लूटे गए करोड़ों रुपयों से नहीं जागा. RBI वैधानिक नियामक है, बैंकों का एजेंट नहीं. ब्याज पर ब्याज बिलकुल गलत है और इसे चार्ज नहीं किया जा सकता. आईबीसी को उद्योग को राहत देने के लिए निलंबित किया गया लेकिन उधारकर्ताओं के बारे में क्या?'

वहीं रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए CREDI ने कहा कि 'ब्याज वसूलने से NPA (Non-Performing Assests) में वृद्धि हो सकती है. यदि ब्याज माफ नहीं किया जा सकता है, तो कम से कम इसे उस स्तर तक कम करें जिस पर बैंक जमाकर्ताओं का भुगतान करते हैं. कम से कम 6 महीने तक की मोहलत दी जाए.'

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 'हम यहां एक समाधान खोजने के लिए हैं. बैंकों को समझने के लिए अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से शामिल हैं. अर्थव्यवस्था  बड़े कॉर्पोरेट्स पर नहीं बल्कि छोटे व्यवसाय पर चलती है. अर्थव्यवस्था के पुनर्निमाण पर बल देने के लिए मजबूत बैंकों की जरूरत है.' उन्होंने कहा कि सीधे ब्याज में छूट से बैंक कमजोर होंगे. विभिन्न क्षेत्रों पर -COVID प्रभाव अलग-अलग हैं. मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने क्या कहा था?

दरअसल, मंगलवार को केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया कि लोन मोरेटोरियम दो साल के लिए बढ़ सकता है. लेकिन यह कुछ ही सेक्टरों को दिया जाएगा. मेहता ने कोर्ट में उन सेक्टरों की सूची सौंपी है, जिन्हें आगे राहत दी जा सकती है. पिछली सुनवाई में लॉकडाउन पीरियड में लोन मोरेटोरियम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए 7 दिन में हलफनामा देकर ब्याज माफी की गुंजाइश पर स्थिति साफ करने को कहा था.

कोर्ट ने कहा था कि 'लोगों की परेशानियों की चिंता छोड़कर आप सिर्फ बिजनेस के बारे में नहीं सोच सकते. सरकार आरबीआई के फैसले की आड़ ले रही है, जबकि उसके पास खुद फैसला लेने का अधिकार है. डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत सरकार बैंकों को ब्याज पर ब्याज वसूलने से रोक सकती है.' अदालत ने कमेंट किया था कि बैंक हजारों करोड़ रुपए एनपीए में डाल देते हैं, लेकिन कुछ महीने के लिए टाली गई ईएमआई पर ब्याज वसूलना चाहते हैं.

क्या है मामला?

बता दें कि कोरोना और लॉकडाउन की वजह से आरबीआई ने मार्च में लोगों को मोरेटोरियम यानी लोन की ईएमआई 3 महीने के लिए टालने की सुविधा दी थी. बाद में इसे 3 महीने और बढ़ाकर 31 अगस्त तक के लिए कर दिया गया. आरबीआई ने कहा था कि लोन की किश्त 6 महीने नहीं चुकाएंगे, तो इसे डिफॉल्ट नहीं माना जाएगा. लेकिन, मोरेटोरियम के बाद बकाया पेमेंट पर पूरा ब्याज देना पड़ेगा.

ब्याज की शर्त को कुछ ग्राहकों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. उनकी दलील है कि मोरेटोरियम में इंटरेस्ट पर छूट मिलनी चाहिए, क्योंकि ब्याज पर ब्याज वसूलना गलत है. एक याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुनवाई में यह मांग भी रखी कि जब तक ब्याज माफी की अर्जी पर फैसला नहीं होता, तब तक मोरेटोरियम पीरियड बढ़ा देना चाहिए.

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