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This Article is From Jul 23, 2015

लिव इन रिलेशनशिप को स्वीकार किया जा रहा है और यह अपराध नहीं है : सुप्रीम कोर्ट

लिव इन रिलेशनशिप को स्वीकार किया जा रहा है और यह अपराध नहीं है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की फाइल फोटो
नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट में आपराधिक मानहानि के मामले की सुनवाई अहम दौर में पहुंच गई है। क्या किसी तरह की टिप्पणी से किसी की मानहानि हो सकती है, ये बहस कई पहलुओं तक जा पहुंची है। यहां तक कि इस मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लिव इन रिलेशनशिप समाज में स्वीकार्य हो चुका है और यह क्राइम नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मॉडर्न दौर में लिव इन रिलेशनशिप को स्वीकार किया जा रहा है और यह अपराध नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस पी. सी. पंत की बेंच ने सरकार से पूछा कि क्या किसी पब्लिक फिगर के लिव इन रिलेशनशिप के बारे में लिखना डिफेमेशन है। इस पर अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि पब्लिक फिगर के पर्सनल लाइफ में लोगों को नहीं झांकना चाहिए, इसमें कोई पब्लिक इंट्रेस्ट नहीं है।

मानहानि से संबंधित कानूनी प्रावधान को खत्म करने के लिए दाखिल याचिका का अटॉर्नी जनरल ने विरोध करते हुए कहा कि इसे खत्म किए जाने से समाज में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल से पूछा कि अगर कोई पब्लिक फिगर लिवइन में रहता है तो इस बारे में कोई लिखता है तो क्या यह मानहानि के दायरे में आएगा।

इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि अगर पब्लिक इंट्रेस्ट में कोई बात नहीं है तो प्राइवेट लाइफ के बारे में लोगों को बताना डिफेमेशन होगा। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस बारे में लिखे जाने से यह डिफेमेटरी कैसे हो जाएगा। इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि अगर बातें पब्लिक इंट्रेस्ट में नहीं है तो कोई उसे सार्वजनिक कैसे और क्यों करे।

हालांकि इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों के लिए सरकारों के रवैये पर भी कड़ा ऐतराज किया। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति की मानहानि होती है तो फिर सरकार उसकी तरफ से मामला क्यों दायर करे। क्या ये जनता के पैसों का दुरुपयोग नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी को मामला दर्ज कराना है तो खुद कराए। जाहिर तौर पर सुप्रीम कोर्ट ने ये नाराजगी दिल्ली सरकार के सरकुलर और हाल ही में तमिलनाडू सरकार के जयललिता के मामले में दर्ज कराए गए मुकदमों पर जताई है।

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