
लालू प्रसाद यादव (फाइल फोटो)
पटना:
राजद द्वारा बुलाए गए एक दिवसीय बंद के चलते दुकानें, शैक्षणिक संस्थान जबरन बंद कराए जाने और कई ट्रेनों का संचालन रोक दिए जाने के कारण आज बिहार में आम जीवन बाधित रहा। राजद के इस बंद को लागू करवाने के लिए हाथों में लाठियां लिए भीड़ सड़कों पर उतर आई थी।
अधिकारियों ने कहा कि राजद द्वारा बुलाए गए बंद के दौरान दुकानें बंद रहीं। कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों को जबरन बंद कराया गया। राष्ट्रीय राजमार्गों समेत सड़कें बाधित कर दी गईं और वाहनों पर हमले बोले गए।
राजद समर्थकों की फौज हाथों में लाठियां और बेंत लिए हुए थी। इन लोगों को राजधानी के व्यस्ततम मार्गों पर टायर और बांस जलाते हुए देखा गया।
अधिकारियों ने कहा कि समर्थकों ने पटना विश्वविद्यालय के कॉलेजों की कक्षाएं बाधित कीं और कॉलेजों को जबरन बंद कराया।
पूर्वी मध्य रेलवे के प्रमुख जनसंपर्क अधिकारी अरविंद कुमार राजक ने कहा, राज्य में कई जगहों पर बंद समर्थकों द्वारा रेल सेवाओं को बाधित किए जाने की खबरें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि पटना-रांची जनशताब्दी एक्सप्रेस को जहानाबाद स्टेशन पर रोक दिया गया था जबकि हातिया-इस्लामपुर एक्सप्रेस को पटना जिले में दानियावान के पास रोक दिया गया।
राजद ने इस बंद का आह्वान दरअसल केंद्र द्वारा कराई गई जाति आधारित जनगणना के आंकड़ों को जल्दी जारी करने की अपनी मांग को बल देने के लिए किया है। हालांकि राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कुछ दिन पहले बिहार बंद का आह्वान करते हुए अपने समर्थकों से कहा था कि वह इस बंद को लागू करते समय रेल सेवाएं बाधित न करें। लेकिन ऐसा लगता है कि उनकी इस अपील का समर्थकों पर कोई असर नहीं हुआ।
बंद को सत्ताधारी जदयू और सपा का भी समर्थन है, क्योंकि उनके कार्यकर्ताओं को भी राज्य की राजधानी के कुछ क्षेत्रों में इसे लागू करते हुए देखा गया।
पटना में दफ्तरों को जा रहे लोगों को जबरन लौटा दिया गया। जिन्होंने आगे जाने की कोशिश की, उन्हें बंद लागू कराने वाले इन लोगों के गुस्से का शिकार होना पड़ा।
सड़कों पर चल रही कारों, ऑटो रिक्शा, साइकिल रिक्शा आदि को नुकसान पहुंचाया गया और उनके टायरों की हवा निकाल दी गई।
आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी, मुकेश कुमार सिंह की कार को उस समय कुछ व्यक्तियों द्वारा क्षतिग्रस्त कर दिया गया, जब वह अपने कार्यालय जा रहे थे।
जिलों से आने वाली खबरों में कहा गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 31, 83 और 110 को कई स्थानों पर बाधित किया गया।
खबरों में कहा गया कि बेगुसराय, भागलपुर, भोजपुर, गोपालगंज, अरवल शहर, पूर्वी चंपारण, पुर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, गया को एक दिवसीय बंद के कारण परेशनियों का सामना करना पड़ा।
राजद के विधायक, पाषर्द और पूर्व मंत्रियों ने बंद को लागू कराने के लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं का नेतृत्व किया।
राज्य की राजधानी में राजद के नेता अपने प्रदेश अध्यक्ष राम चंद्र पुरवे के नेतृत्व में बंद को लागू करवाने के लिए पार्टी मुख्यालय से बाहर आए। राजद के प्रतीक चिन्हों वाले झंडे और बैनर लेकर इन लोगों ने जाति आधारित जनगणना के आंकडे जारी करने की मांग करते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
पार्टी के सदस्यों के साथ मार्च करते हुए पुरवे ने कहा, बिहार पूरी तरह से बंद है। जाति आधारित जनगणना के आंकड़े जारी करने की हमारी मांग को व्यापक समर्थन है और जनता ने राज्यभर में इसे समर्थन दिया है। उन्होंने धमकी दी कि यदि ये आंकड़े इसके बाद जारी नहीं किए जाते हैं तो वे आंदोलन तेज करेंगे।
उन्होंने कहा, दलितों, वंचितों और गरीबों के लिए यह स्वतंत्रता की दूसरी लड़ाई है। पुरवे ने बंद के दौरान सड़कों पर होने वाली गुंडागर्दी में राजद कार्यकर्ताओं के शामिल होने से इनकार करते हुए कहा कि यह भाजपा के कार्यकर्ताओं का काम हो सकता है ताकि राजद की छवि खराब की जा सके।
अधिकारियों ने कहा कि राजद द्वारा बुलाए गए बंद के दौरान दुकानें बंद रहीं। कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों को जबरन बंद कराया गया। राष्ट्रीय राजमार्गों समेत सड़कें बाधित कर दी गईं और वाहनों पर हमले बोले गए।
राजद समर्थकों की फौज हाथों में लाठियां और बेंत लिए हुए थी। इन लोगों को राजधानी के व्यस्ततम मार्गों पर टायर और बांस जलाते हुए देखा गया।
अधिकारियों ने कहा कि समर्थकों ने पटना विश्वविद्यालय के कॉलेजों की कक्षाएं बाधित कीं और कॉलेजों को जबरन बंद कराया।
पूर्वी मध्य रेलवे के प्रमुख जनसंपर्क अधिकारी अरविंद कुमार राजक ने कहा, राज्य में कई जगहों पर बंद समर्थकों द्वारा रेल सेवाओं को बाधित किए जाने की खबरें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि पटना-रांची जनशताब्दी एक्सप्रेस को जहानाबाद स्टेशन पर रोक दिया गया था जबकि हातिया-इस्लामपुर एक्सप्रेस को पटना जिले में दानियावान के पास रोक दिया गया।
राजद ने इस बंद का आह्वान दरअसल केंद्र द्वारा कराई गई जाति आधारित जनगणना के आंकड़ों को जल्दी जारी करने की अपनी मांग को बल देने के लिए किया है। हालांकि राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कुछ दिन पहले बिहार बंद का आह्वान करते हुए अपने समर्थकों से कहा था कि वह इस बंद को लागू करते समय रेल सेवाएं बाधित न करें। लेकिन ऐसा लगता है कि उनकी इस अपील का समर्थकों पर कोई असर नहीं हुआ।
बंद को सत्ताधारी जदयू और सपा का भी समर्थन है, क्योंकि उनके कार्यकर्ताओं को भी राज्य की राजधानी के कुछ क्षेत्रों में इसे लागू करते हुए देखा गया।
पटना में दफ्तरों को जा रहे लोगों को जबरन लौटा दिया गया। जिन्होंने आगे जाने की कोशिश की, उन्हें बंद लागू कराने वाले इन लोगों के गुस्से का शिकार होना पड़ा।
सड़कों पर चल रही कारों, ऑटो रिक्शा, साइकिल रिक्शा आदि को नुकसान पहुंचाया गया और उनके टायरों की हवा निकाल दी गई।
आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी, मुकेश कुमार सिंह की कार को उस समय कुछ व्यक्तियों द्वारा क्षतिग्रस्त कर दिया गया, जब वह अपने कार्यालय जा रहे थे।
जिलों से आने वाली खबरों में कहा गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 31, 83 और 110 को कई स्थानों पर बाधित किया गया।
खबरों में कहा गया कि बेगुसराय, भागलपुर, भोजपुर, गोपालगंज, अरवल शहर, पूर्वी चंपारण, पुर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, गया को एक दिवसीय बंद के कारण परेशनियों का सामना करना पड़ा।
राजद के विधायक, पाषर्द और पूर्व मंत्रियों ने बंद को लागू कराने के लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं का नेतृत्व किया।
राज्य की राजधानी में राजद के नेता अपने प्रदेश अध्यक्ष राम चंद्र पुरवे के नेतृत्व में बंद को लागू करवाने के लिए पार्टी मुख्यालय से बाहर आए। राजद के प्रतीक चिन्हों वाले झंडे और बैनर लेकर इन लोगों ने जाति आधारित जनगणना के आंकडे जारी करने की मांग करते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
पार्टी के सदस्यों के साथ मार्च करते हुए पुरवे ने कहा, बिहार पूरी तरह से बंद है। जाति आधारित जनगणना के आंकड़े जारी करने की हमारी मांग को व्यापक समर्थन है और जनता ने राज्यभर में इसे समर्थन दिया है। उन्होंने धमकी दी कि यदि ये आंकड़े इसके बाद जारी नहीं किए जाते हैं तो वे आंदोलन तेज करेंगे।
उन्होंने कहा, दलितों, वंचितों और गरीबों के लिए यह स्वतंत्रता की दूसरी लड़ाई है। पुरवे ने बंद के दौरान सड़कों पर होने वाली गुंडागर्दी में राजद कार्यकर्ताओं के शामिल होने से इनकार करते हुए कहा कि यह भाजपा के कार्यकर्ताओं का काम हो सकता है ताकि राजद की छवि खराब की जा सके।
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