अलीगढ़ / बुलंदशहर / नई दिल्ली:
किसानों के हक की लड़ाई के लिए चार दिन की पदयात्रा के बाद शनिवार को अलीगढ़ में हुई किसान महापंचायत में कांग्रेस महासचिव और भविष्य के प्रधानमंत्री राहुल गांधी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की नीयत में खोट है। मायावती सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव के संग्राम का एक तरह से बिगुल भी फूंक दिया। मायावती सरकार की नई भूमि अधिग्रहण नीति की खामियां गिनाते हुए राहुल ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार किसान को उनका वाजिब हक न देकर उनपर गोलियां चलाती है। उन्होंने संसद में किसान हितैषी भूमि अधिग्रहण विधेयक को लाने की बात कहते हुए उसमें किसानों के विचार लिए जाने की वकालत की। अलीगढ़ शहर के नुमाइश मैदान में किसान महापंचायत के दौरान हजारों लोगों को सम्बोधित करते हुए राहुल ने कहा, "उत्तर प्रदेश में किसानों से जमीन लेकर बिल्डरों को दी जा रही है। उन्हें उनका हक और उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। जब वे आवाज उठाते हैं तो उनको मारा जाता है..उन पर गोलियां चलाई जाती हैं। भट्टा पारसौल और टप्पल इसके उदाहरण हैं।" गौरतलब है कि किसानों से जमीन लेकर बिल्डरों को दिए जाने पर आपत्ति जताते हुए हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने ग्रेटर नोएडा के आस-पास हुए भूमि अधिग्रहण को अनुचित करार दिया है। इस कारण बिल्डरों से फ्लैट खरीदने की मंशा पाले हुए हजारों लोगों को अपना पैसा फंसता नजर आ रहा है। राहुल ने कहा, "भट्टा पारसौल की घटना के बाद मुख्यमंत्री मायावती ने यहां नई भूमि अधिग्रहण नीति बनाई और किसानों से कहा कि अब तक चली आ रही पुरानी नीति गलत थी, हम आपको एक नई नीति देंगे जबकि मायावती सरकार द्वारा लाई नई अधिग्रहण नीति में बहुत खामियां हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि मायावती सरकार की नीयत में खोट है, तभी तो नई नीति वर्ष 2011 से शुरू होगी, जिसका लाभ भट्टा पारसौल गांव और टप्पल के उन हजारों किसानों को नहीं मिलेगा जिन्होंने लाठियां और गोलियां खाई हैं। उनको इस नीति में शामिल नहीं किया गया। क्या वे सवाल नहीं पूछ सकते हैं कि उनका भविष्य क्या होगा..उनके बच्चों का क्या होगा। महापंचायत से पहले राहुल ने किसानों से समस्याएं जानने के लिए ग्रेटर नोएडा से मथुरा तक चार दिवसीय पदयात्रा निकाली थी। इस दौरान उन्होंने यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते में पड़ने वाले गांवों में चौपालें लगाकर लोगों से उनकी दिक्कतें सुनीं। कांग्रेस महासचिव ने कहा, "पदयात्रा के दौरान किसानों ने मुझ्झसे कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून बहुत पुराना है, जिससे मुश्किलें आ रही हैं। यह बात सही है कि कानून पुराना है और हमारी पूरी कोशिश होगी कि हम इसको बदलें और लोकसभा में एक ऐसा विधेयक लाएं जिसका फायदा आप सबको हो..किसानों और मजदूरों को हो।" सम्बोधन से पहले मंच पर कार्यकर्ताओं की तरफ से राहुल का स्वागत एक हल भेंट करके किया गया, वहीं महापंचायत में शिरकत करने आए कुछ किसान प्रतिनिधियों ने मंच पर आकर उनके सिर पर पगड़ी बांधी। राहुल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के किसान विकास के कतई खिलाफ नहीं हैं। उन्हें सड़कों और पुलों के लिए जमीन देने में कोई परेशानी नहीं है। वे कहते हैं कि इससे देश का विकास होगा और देश के लोगों को फायदा होगा, लेकिन उत्तर प्रदेश की सरकार लाखों किसानों की जमीन रेसिंग ट्रैक, कालोनी और गोल्फ कोर्स बनाने के लिए छीन रही है। उन्होंने कहा, "पिछले चार दिन से उत्तर प्रदेश के किसानों के बारे में मैंने जितना जाना, उतना शायद दिल्ली में बैठकर नहीं समझ्झ सकता था। मैंने देखा कि जितनी समझ्झ उत्तर प्रदेश के किसानों और मजदूरों में है उतनी शायद बड़े-बड़े अफसरों में नहीं होगी।" नई भूमि अधिग्रहण नीति में बदलाव का संकेत देते हुए कांग्रेस महासचिव ने कहा, "मेरी यह सोच है कि अगर हम कानून बनाएं और कानून के बारे में बातचीत करें तो आपकी राय ली जानी चाहिए। आपकी सोच नए कानून में शामिल होनी चाहिए।" विरोधी दलों द्वारा उनकी पदयात्रा को नौटंकी बताए जाने का मंच से जवाब देते हुए कांग्रेस महासचिव ने कहा, "कई लोग कह रहे हैं कि ये नौटंकी है। अगर वे इसे नौटंकी मानते हैं तो यही सही।" उन्होंने तर्क दिया, "मेरी सोच है कि राजनेता को किसानों के बीच जाकर उनसे सीधा संवाद स्थापित करने की जरूरत है। जनता के बीच जाए बिना और उनकी बात सुने बिना समस्याएं नहीं सुलझाई जा सकती हैं।" करीब पंद्रह मिनट के अपने सम्बोधन के अंत में राहुल गांधी ने भावुक होकर कहा, "पदयात्रा के दौरान चार दिनों में मुझे आप लोगों (किसानों) से बहुत कुछ सीखने और समझने को मिला। आपने मुझे जितना प्यार दिया और अपने घर में खाना खिलाया, उसके लिए मैं आप लोगों को धन्यवाद देता हूं।" किसान रैली में राहुल गांधी के अलावा केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट, जितिन प्रसाद, सलमान खुर्शीद और पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह भी मौजूद थे।
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किसान महापंचायत, राहुल गांधी, अलीगढ़