
नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने वाले केरल के अफसर के खिलाफ केरल सरकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। बता दें कि इस अफसर ने साल 2013 में एक अखबार में छपे लेख में नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने केरल की कांग्रेस नीत यूडीएफ सरकार को नोटिस जारी करके डॉ. बी अशोक की याचिका पर जवाब मांगा है। बी. अशोक ने सरकार की उनके खिलाफ कार्रवाई के खिलाफ याचिका दायर की थी।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ने एक अखबार में लेख लिखा था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्यों तिरुवनंतपुरम के सिवगिरी मठ में आने की इजाजत नहीं होनी चाहिए। उस समय इस मामले पर विवाद भी चल रहा था।
मठ ने उस समय नरेंद्र मोदी को अपने यहां एक कार्यक्रम में आमंत्रित किया था, जिसका वाम दलों के नेतृत्व में एलडीएफ ने विरोध किया था। 2002 दंगों को आधार बनाकर मोदी के मंदिर में आने का विरोध किया जा रहा था। अपने लेख में अशोक ने लिखा था कि दंगों को आधार बनाकर मोदी का मठ के कार्यक्रम में आने का विरोध नहीं किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने केरल की कांग्रेस नीत यूडीएफ सरकार को नोटिस जारी करके डॉ. बी अशोक की याचिका पर जवाब मांगा है। बी. अशोक ने सरकार की उनके खिलाफ कार्रवाई के खिलाफ याचिका दायर की थी।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ने एक अखबार में लेख लिखा था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्यों तिरुवनंतपुरम के सिवगिरी मठ में आने की इजाजत नहीं होनी चाहिए। उस समय इस मामले पर विवाद भी चल रहा था।
मठ ने उस समय नरेंद्र मोदी को अपने यहां एक कार्यक्रम में आमंत्रित किया था, जिसका वाम दलों के नेतृत्व में एलडीएफ ने विरोध किया था। 2002 दंगों को आधार बनाकर मोदी के मंदिर में आने का विरोध किया जा रहा था। अपने लेख में अशोक ने लिखा था कि दंगों को आधार बनाकर मोदी का मठ के कार्यक्रम में आने का विरोध नहीं किया जाना चाहिए।
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