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This Article is From Aug 14, 2019

जम्मू एवं कश्मीर, लद्दाख को स्थानीय लोगों की इच्छाओं के अनुरूप विकसित किया जाएगा: PM नरेंद्र मोदी

Jammu and Kashmir : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले 75 दिन की अवधि के दौरान जो सबसे बड़ा निर्णय लिया, वह है कश्मीर पर लिया गया फैसला. उनके मुताबिक, उन्होंने यह निर्णय इसलिए लिया, ताकि...

जम्मू एवं कश्मीर, लद्दाख को स्थानीय लोगों की इच्छाओं के अनुरूप विकसित किया जाएगा: PM नरेंद्र मोदी
PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी- (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  (PM Modi)  ने अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले 75 दिन की अवधि के दौरान जो सबसे बड़ा निर्णय लिया, वह है कश्मीर पर लिया गया फैसला. उनके मुताबिक, उन्होंने यह निर्णय इसलिए लिया, ताकि वहां बेहतर एकजुटता और आवागमन सुनिश्चित हो और दोहरी नागरिकता का झूठा सिद्धांत हमेशा के लिए समाप्त हो जाए.

अपने दूसरे कार्यकाल के प्रारंभ में ही कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए कटिबद्ध दिख रहे प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) का यह कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है. समाचार एजेंसी IANS ने अनुच्छेद 370 पर उनके निर्णय, जिसका बहुत-से लोगों ने स्वागत किया है, और कुछ ने विरोध किया है, के बारे में उनसे कई सवाल पूछे.

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जब प्रधानमंत्री से पूछा गया, इस समय एक असहज-सी शांति देखने को मिल रही है, सो, आपको क्यों लगता है कि जम्मू एवं कश्मीर के लोग आपके साथ खड़े होंगे, तो प्रधानमंत्री ने अपने अंदाज़ में स्पष्टता के साथ जवाब दिया, "कश्मीर पर लिए गए निर्णय का जिन लोगों ने विरोध किया, उनकी जरा सूची देखिए - असामान्य निहित स्वार्थी समूह, राजनीतिक परिवार, जो आतंक से सहानुभूति रखते हैं और कुछ विपक्ष के मित्र - लेकिन भारत के लोगों ने अपनी राजनीतिक संबद्धताओं से इतर जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के बारे में उठाए गए कदमों का समर्थन किया है... यह राष्ट्र के बारे में है, राजनीति के बारे में नहीं... भारत के लोग देख रहे हैं कि जो निर्णय कठिन, मगर ज़रूरी थे, और पहले असंभव लगते थे, वे आज हकीकत बन रहे हैं..."

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट विचार है कि घाटी में जीवन सामान्य हो जाएगा. उन्होंने कहा कि इस प्रावधान ने वास्तव में भारत का नुकसान किया है, और इससे मुट्ठीभर परिवारों और कुछ अलगाववादियों को लाभ हुआ है. PM ने कहा, "इस बात से अब हर कोई स्पष्ट रूप से वाकिफ है कि अनुच्छेद 370 और 35ए ने किस तरह जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख को पूरी तरह अलग-थलग कर रखा था... सात दशकों की इस स्थिति से लोगों की आकांक्षाएं पूरी नहीं हो पाईं... नागरिकों को विकास से दूर रखा गया... हमारा दृष्टिकोण अलग है - गरीबी के दुष्चक्र से निकालकर लोगों को अधिक आर्थिक अवसरों से जोड़ने की आवश्यकता है... वर्षों तक ऐसा नहीं हुआ... अब हम विकास को एक मौका दें..."

प्रधानमंत्री ने अपने कश्मीरी भाइयों से एक उत्कट विनती की, "जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के मेरे भाई-बहन हमेशा एक बेहतर अवसर चाहते थे, लेकिन अनुच्छेद 370 ने ऐसा नहीं होने दिया... महिलाओं और बच्चों, SC और ST समुदायों के साथ अन्याय हुआ... सबसे बड़ी बात कि जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के लोगों के इनोवेटिव विचारों का उपयोग नहीं हो पाया... आज BPO से लेकर स्टार्टअप तक, खाद्य प्रसंस्करण से लेकर पर्यटन तक, कई उद्योगों में निवेश आ सकता है और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार पैदा हो सकता है... शिक्षा और कौशल विकास भी फलेगा-फूलेगा..."

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उन्होंने कहा, "मैं जम्मू एवं कश्मीर के अपने बहनों और भाइयों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि ये क्षेत्र स्थानीय लोगों की इच्छाओं, सपनों और महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप विकसित किए जाएंगे... अनुच्छेद 370 और 35ए ज़ंजीरों की तरह थे, जिनमें लोग जकड़े हुए थे... ये ज़ंजीरें अब टूट गई हैं..."

जो लोग जम्मू एवं कश्मीर पर लिए गए निर्णय का विरोध कर रहे हैं, उनके बारे में प्रधानमंत्री का मानना है कि वे बस एक बुनियादी सवाल का उत्तर दे दें, "अनुच्छेद 370 और 35ए को वे क्यों बनाए रखना चाहते हैं..?"

उन्होंने कहा, "उनके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है... और ये वही लोग हैं, जो हर उस चीज का विरोध करते हैं, जो आम आदमी की मदद करने वाली होती है... रेल पटरी बनती है, वे उसका विरोध करेंगे... उनका दिल केवल नक्सलियों और आतंकवादियों के लिए धड़कता है... आज हर भारतीय जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के लोगों के साथ खड़ा है और मुझे भरोसा है कि वे विकास को बढ़ावा देने और शांति लाने में हमारे साथ खड़ा रहेंगे..."

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IANS ने लोकतंत्र को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बारे में पूछा, क्या कश्मीर के लोगों की आवाज सुनी जाएगी, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निश्चयपूर्वक कहा, "कश्मीर ने कभी भी लोकतंत्र के पक्ष में इतनी मजबूत प्रतिबद्धता नहीं देखी... पंचायत चुनाव के दौरान लोगों की भागीदारी को याद कीजिए... लोगों ने बड़ी संख्या में मत डाले और धमकाने के आगे झुके नहीं... नवंबर-दिसंबर, 2018 में 35,000 सरपंच चुने गए और पंचायत चुनाव में रिकॉर्ड 74 फीसदी मतदान हुआ... पंचायत चुनाव के दौरान कोई हिंसा नहीं हुई... चुनावी हिंसा में रक्त की एक बूंद भी नहीं गिरी... यह तब हुआ, जब मुख्यधारा के दलों ने इस पूरी प्रक्रिया के प्रति उदासीनता दिखाई थी... यह बहुत संतोष देने वाला है कि अब पंचायतें विकास और मानव सशक्तीकरण के लिए फिर सबसे आगे आ गई हैं... कल्पना कीजिए, इतने सालों तक सत्ता में रहने वालों ने पंचायतों को मजबूत करने को विवेकपूर्ण नहीं पाया... और यह भी याद रखिए कि लोकतंत्र पर वे महान उपदेश देते हैं, लेकिन उनके शब्द कभी काम में नहीं बदलते..."

यह साफ है कि प्रधानमंत्री उस गुत्थी को सुलझाने पर अडिग थे, जिसे दुःसाध्य माना जा रहा था, उन्होंने इस मुद्दे का विशद अध्ययन किया. उन्होंने कहा, "इसने मुझे चकित और दुखी किया कि 73वां संशोधन जम्मू एवं कश्मीर में लागू नहीं होता... ऐसे अन्याय को कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है...? यह बीते कुछ सालों में हुआ है, जब जम्मू एवं कश्मीर में पंचायतों को लोगों को प्रगति की दिशा में काम करने के लिए शक्तियां मिलीं... 73वें संशोधन के तहत पंचायतों को दिए गए कई विषयों को जम्मू एवं कश्मीर की पंचायतों को स्थानांतरित किया गया... अब मैंने माननीय राज्यपाल से ब्लॉक पंचायत चुनाव की दिशा में काम करने का अनुरोध किया है... हाल में जम्मू एवं कश्मीर प्रशासन ने 'बैक टू विलेज' कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें लोगों को नहीं, बल्कि समूची सरकारी मशीनरी को लोगों तक पहुंचना पड़ा... वे केवल लोगों की समस्याओं को कम करने के लिए उन तक पहुंचे... आम नागरिकों ने इस कार्यक्रम को सराहा... इन प्रयासों का नतीजा सभी लोगों के सामने है... स्वच्छ भारत, ग्रामीण विद्युतीकरण और ऐसी ही अन्य पहलें जमीनी स्तर तक पहुंच रही हैं... वास्तविक लोकतंत्र यही है..."

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जम्मू एवं कश्मीर में गलतियों और असंतुलन को सुधारना प्रधानमंत्री के इरादे का आधार है, जैसा उन्होंने कहा, "मैंने लोगों को आश्वस्त किया है कि जम्मू, कश्मीर में चुनाव जारी रहेंगे और केवल इन क्षेत्रों के लोग हैं, जो वृहत्तर जनसमुदाय का प्रतिनिधित्व करेंगे... हां, जिन्होंने कश्मीर पर शासन किया, वे सोचते हैं कि यह उनका दैवीय अधिकार है, वे लोकतंत्रीकरण को नापसंद करेंगे और गलत बातें बनाएंगे... वे नहीं चाहते कि अपनी मेहनत से सफल युवा नेतृत्व उभरे... ये वही लोग हैं, जिनका 1987 के चुनाव में आचरण संदिग्ध रहा... अनुच्छेद 370 ने पारदर्शिता और जवाबदेही से परे जाकर स्थानीय राजनैतिक वर्ग को लाभ पहुंचाया... इसको हटाया जाना लोकतंत्र को और मजबूत करेगा..."

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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