विदेश मंत्री एस जयशंकर (Foreign Minister S Jaishankar) ने सोमवार को कहा कि भारत की रूस से एक महीने में तेल की कुल खरीद संभवत: यूरोप की एक दोपहर में हुई खरीद की तुलना में कम है. 2+2 मंत्रिस्तरीय बैठक के समापन के बाद जयशंकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ अपने अमेरिकी समकक्षों विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेन्स को संबोधित कर रहे थे.
एस जयशंकर ने रूस से भारत की तेल खरीद के बारे में पूछे जाने पर एक संवाददाता से कहा, "मैंने देखा है कि आप तेल खरीद का उल्लेख कर रहे हैं. यदि आप रूस से ऊर्जा खरीद देख रहे हैं, तो मैं सुझाव दूंगा कि आपका ध्यान यूरोप पर भी केंद्रित होना चाहिए. हम कुछ ऊर्जा खरीदते हैं, जो हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है लेकिन मुझे आंकड़ों पर संदेह है, शायद एक महीने में हमारी कुल खरीद यूरोप की एक दोपहर में हुई खरीद की तुलना में कम होगी."
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जयशंकर ने कहा कि भारत ने (रूस-यूक्रेन युद्ध पर) कई बयान दिए हैं जो संयुक्त राष्ट्र, भारतीय संसद और अन्य मंचों में अपनी स्थिति को रेखांकित करता है. उन्होंने कहा, "और संक्षेप में, उन स्थितियों से पता चलता है कि हम संघर्ष के खिलाफ हैं. हम बातचीत और कूटनीति के पक्ष में हैं. हम हिंसा की तत्काल समाप्ति चाहते हैं, और हम इन उद्देश्यों के लिए किसी भी तरह से योगदान करने के लिए तैयार हैं."
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व्हाइट हाउस भी तेल खरीद के मुद्दे पर भारत के बचाव में आया है, यह देखते हुए कि उसकी कुल खरीद संयुक्त राज्य अमेरिका से होने वाले 10 प्रतिशत के मुकाबले एक-दो प्रतिशत कम ही है.
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी से पूछा गया कि "क्या प्रधान मंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल आयात में तेजी नहीं लाने या बढ़ाने के लिए कोई प्रतिबद्धता दोहराई तो उन्होंने कहा, "मैं प्रधान मंत्री मोदी और भारतीयों को ही उस पर बोलने को कहूंगी. फिर, इस समय यह 1 से 2 प्रतिशत ही है. वे संयुक्त राज्य अमेरिका से 10 प्रतिशत आयात करते हैं. यह किसी भी प्रतिबंध या उस तर्ज पर किसी भी चीज़ का उल्लंघन नहीं है. यह एक रचनात्मक, सीधी बातचीत थी लेकिन मैं उन्हें ही अपनी बात कहने को कहूंगी."
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने संवाददाताओं से कहा कि बाइडन ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई डिजिटल बैठक के दौरान कहा कि रूस से अपने तेल आयात में तेजी लाना या इसे बढ़ाना भारत के हित में नहीं है.. साकी ने मोदी-बाइडन वार्ता के तुरंत बाद अपने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से कहा कि वार्ता रचनात्मक रही और भारत के साथ संबंध अमेरिका और राष्ट्रपति के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं.
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उन्होंने कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका से तेल आयात पहले से ही महत्वपूर्ण है - यह रूस से प्राप्त होने वाले आयात से बहुत बड़ा है. हमने, निश्चित रूप से - राष्ट्रपति ने बहुत स्पष्ट रूप से बताया कि इसे बढ़ाना उनके हित में नहीं है लेकिन इससे आगे, मैं भारतीय नेताओं को अपनी बात कहने दूंगी."
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि रूस से तेल की खरीद बढ़ाना भारत के हित में नहीं है और वह ऊर्जा आयात में और विविधता लाने में भारत की मदद करने को तैयार हैं. व्हाइट हाउस ने यह जानकारी दी है.
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