
नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने कहा, 'मैं तालिबान से बिनती करता हूं, मुझे ले जाएं और इन बच्चों को छोड़ दें।'
बाल मजदूरी के खिलाफ और बच्चों के अधिकारों के लिए वर्षों से अभियान चला रहे कैलाश सत्यार्थी ने इस घटना प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एनडीटीवी से कहा, 'यह मेरी जिंदगी की सबसे चौंकाने वाली घटना है। ये बच्चे मेरे बच्चे हैं।'
हाल में नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में सत्यार्थी को पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के लिए आवाज़ बुलंद करने और इस वजह से तालिबान के हमले की शिकार हुई मलाला यूसुफजई के साथ हाल ही संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार के लिए सम्मानित किया गया था।
वहीं मलाला यूसुफजई ने एक बयान में कहा, 'पेशावर में आतंक की इस संवेदनहीन और नृशंस कृत्य से मेरा दिल टूट चुका है।'
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