"ब्यूरोक्रेसी ड्रामे के चलते कितनी जीवन रक्षक सामग्री अटकी है" : ओवैसी ने PMO से पूछा 

भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर में कोरोना के मामलों में बेलगाम उछाल देखने को मिला है. जिसके बाद अस्पतालों में बेड्स, ऑक्सीजन सिलेंडर जैसी बुनियादी सुविधाओं का संकट हो गया.

अंतरराष्ट्रीय मदद को लेकर ओवैसी का पीएमओ से सवाल (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

कोरोनावायरस (Coronavirus) महामारी का कहर झेल रहे भारत की मदद को दुनियाभर के कई देश आगे आए हैं. अमेरिका, रूस, ब्रिटेन समेत कई देश भारत को चिकित्सा मदद की खेप भेज रहे हैं. इनमें ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, कोविड टेस्ट किट समेत अन्य जरूरी सामान शामिल हैं. इस बीच, ऑल इंडिया मजलिस-ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के सुप्रीमो और सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने अंतरराष्ट्रीय मदद के देश में वितरण को लेकर सवाल उठाते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा है.    

असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को एनडीटीवी की खबर का स्क्रीनशॉट पोस्ट करते हुए अपने ट्वीट में कहा, "हमें कम से कम 300 टन अंतरराष्ट्रीय सहायता मिली है. प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) हमें यह नहीं बता रहा है कि इसका क्या हुआ. ब्यूरोक्रेटिक (नौकरशाही) नाटक के चक्कर में कितनी जीवन रक्षक सामग्री भंडारण में फंसी हुई है? यह अक्षमता नहीं बल्कि देश के नागरिकों के लिए करुणा का अभाव है."

भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर में कोरोना के मामलों में बेलगाम उछाल देखने को मिला है. जिसके बाद अस्पतालों में बेड्स, ऑक्सीजन सिलेंडर जैसी बुनियादी सुविधाओं का संकट हो गया. देश के विभिन्न हिस्सों से ऑक्सीजन की कमी की वजह से लोगों की जान जाने की खबरें आ रही हैं. 

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दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्र से पूछा कि कितने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर कस्टम विभाग में अटके हुए हैं इसकी जानकारी 3 बजे तक दी जाए. सुनवाई के दौरान वकील अमित महाजन ने कहा कि कोई निश्चित संख्या नहीं है. इस पर कोर्ट ने कहा कि 'हम आपके जवाब से संतुष्ट नहीं है आप इसपर स्पष्ट जवाब दीजिए.' दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि हम ऑक्सीज़न की कमी से लोगों को मरने नहीं दे सकते हैं.

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