
फाइल फोटो
नरसिंहपुर:
गत चार अगस्त की आधी रात के आसपास मध्य प्रदेश के हरदा कस्बे के नजदीक ट्रेन हादसे में अपने परिवार के नौ सदस्यों के साथ जान गंवाने वाली 26 वर्षीय विनीता बाथरे ने डूबने से पहले आखिरी बार कहा था, ‘‘ट्रेन पुल से गिर गई है और हम डूबने वाले हैं।’’ विनीता ने मौत को सामने भांप लिया था और उसी समय उमरा गांव में अपने भाई जितेंद्र बाथरे को फोन कर उन्हें बताया कि उनका परिवार हादसे का शिकार हो गया है।
जितेंद्र ने बताया कि मेरे परिवार के 14 सदस्य खुशी खुशी गोटेगांव (नरसिंहपुर) से शिरडी जाने के लिए जनता एक्सप्रेस में चढ़े थे। वे साईबाबा के दर्शन करने जा रहे थे।’’ उन्होंने कहा कि शायद उन लोगों को पता नहीं था कि एक भयावह हादसा उनका इंतजार कर रहा है।
उन्होंने बताया, ‘‘आधी रात के करीब मेरा फोन बजने लगा जो कि असामान्य सी बात थी। मैंने केवल इतना सुना कि ट्रेन पुल से गिर गयी है और हम डूबने वाले हैं। इसके बाद विनीता का फोन बेकार हेा गया।’’ जितेंद्र के मुताबिक उनके परिवार और मित्रों में से केवल तीन जीवित बचे।
जितेंद्र ने बताया कि मेरे परिवार के 14 सदस्य खुशी खुशी गोटेगांव (नरसिंहपुर) से शिरडी जाने के लिए जनता एक्सप्रेस में चढ़े थे। वे साईबाबा के दर्शन करने जा रहे थे।’’ उन्होंने कहा कि शायद उन लोगों को पता नहीं था कि एक भयावह हादसा उनका इंतजार कर रहा है।
उन्होंने बताया, ‘‘आधी रात के करीब मेरा फोन बजने लगा जो कि असामान्य सी बात थी। मैंने केवल इतना सुना कि ट्रेन पुल से गिर गयी है और हम डूबने वाले हैं। इसके बाद विनीता का फोन बेकार हेा गया।’’ जितेंद्र के मुताबिक उनके परिवार और मित्रों में से केवल तीन जीवित बचे।
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