"हनुमान चालीसा तक ठीक है, लेकिन घर का खाना नहीं मिलेगा..." : चित्रा रामकृष्ण से कोर्ट

न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने कहा, "हर कैदी एक जैसा होता है. वह जो रही हैं, उसकी वजह से वह वीआईपी कैदी नहीं हो सकती. नियमों को नहीं बदला जा सकता है." हालांकि, अदालत ने उन्हें एक प्रार्थना पुस्तक, हनुमान चालीसा और भगवद गीता की एक प्रति ले जाने की अनुमति दी है.

चित्रा रामकृष्ण ने जमानत की मांग करते हुए एक याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि एजेंसी अब उनकी हिरासत की मांग नहीं कर सकती है.

नई दिल्ली:

पूर्व नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) प्रमुख चित्रा रामकृष्ण को 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया गया है. उन पर एक व्यक्ति जिसे हिमालयी योगी बताया गया, के साथ निजी जानकारी साझा करना का आरोप लगा है. साल 2013 से एनएसई का नेतृत्व कर रही 59 वर्षीय चित्रा रामकृष्ण को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बाजार में हेरफेर और घोटाले के चलते पूछताछ के बाद 24 फरवरी को गिरफ्तार किया था. दरअसल, साल 2018 में एक मामला दर्ज हुआ था, जिसमें कुछ दलालों को व्यापार में अनुचित लाभ मिला था. एजेंसी अब मार्केट एक्सचेंजों के कंप्यूटर सर्वर से स्टॉक ब्रोकरों को सूचना के लीक होने के आरोपों की जांच कर रही है, जिसे "सह-स्थान घोटाला" के रूप में जाना जाने लगा है. 

चित्रा रामकृष्ण ने जमानत की मांग करते हुए एक याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि एजेंसी अब उनकी हिरासत की मांग नहीं कर सकती है. लेकिन सीबीआई ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया कि वह एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उनकी विदेश यात्राओं और मामले के अन्य पहलुओं पर जांच अभी भी जारी है. एजेंसी ने तर्क दिया, "इसलिए हम चाहते हैं कि उसे न्यायिक हिरासत में भेजा जाए." 

अदालत ने जेल कस्टडी को मंजूरी दे दी है और उनके द्वारा घर के भोजन और अन्य सुविधाओं के लिए किए गए अनुरोध को भी खारिज कर दिया. न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने कहा, "हर कैदी एक जैसा होता है. वह जो रही हैं, उसकी वजह से वह वीआईपी कैदी नहीं हो सकती. नियमों को नहीं बदला जा सकता है." हालांकि, अदालत ने उन्हें एक प्रार्थना पुस्तक, हनुमान चालीसा और भगवद गीता की एक प्रति ले जाने की अनुमति दी है.

बता दें कि रामकृष्णा को सीबीआई ने दिल्ली के एक स्टॉकब्रोकर के खिलाफ करीब चार साल की जांच के बाद गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा एक रिपोर्ट जारी करने के बाद हुई, जिसमें एनएसई के शीर्ष प्रबंधन द्वारा सत्ता के कथित दुरुपयोग का संकेत दिया गया था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि रामकृष्णा को लगभग 20 वर्षों तक सभी व्यक्तिगत और व्यावसायिक मामलों में एक रहस्यमय "हिमालयी योगी" द्वारा निर्देशित किया गया था. बाद में "योगी" का खुलासा स्टॉक एक्सचेंज के एक पूर्व अधिकारी आनंद सुब्रमण्यम के रूप में हुआ, जिसे बाजार में हेरफेर के मामले में गिरफ्तार किया गया था.

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