
नरेंद्र मोदी और वेंकैया नायडू (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
लैंड बिल पर मोदी सरकार थोड़ी नरम दिख रही है। अब बिल पर राज्यों को भी हक देने की तैयारी की जा रही है। भूमि अधिग्रहण पर अब राज्य भी कानून बना सकेंगे। राज्य जो कानून बनाएंगे उसे राष्ट्रपति मंज़ूरी देंगे, यानी अब राज्य सहमति के मुद्दे, सोशल इंपेक्ट का अध्ययन और मुआवज़ा अपने हिसाब से तय कर सकते हैं।
केंद्र सरकार ने अपनी तरफ से ग्रामीण इलाकों में चार गुना और शहरी इलाकों में दो गुना मुआवज़ा तय किया है। राज्यों को अधिकार देकर बीजेपी यह दिखाने की कोशिश कर सकती है कि उनकी पार्टी के शासन वाले राज्यों में जमीन अधिग्रहण के बाद विकास योजनाओं की क्या स्थिति है और कांग्रेस के शासन वाले राज्य में क्या स्थिति है।
भूमि अधिग्रहण पर ज्वाइंट कमेटी अपनी रिपोर्ट 3 अगस्त तक सौंप सकती है और इस बात की उम्मीद है कि कई अहम बदलाव किए गए हैं।
केंद्र सरकार ने अपनी तरफ से ग्रामीण इलाकों में चार गुना और शहरी इलाकों में दो गुना मुआवज़ा तय किया है। राज्यों को अधिकार देकर बीजेपी यह दिखाने की कोशिश कर सकती है कि उनकी पार्टी के शासन वाले राज्यों में जमीन अधिग्रहण के बाद विकास योजनाओं की क्या स्थिति है और कांग्रेस के शासन वाले राज्य में क्या स्थिति है।
भूमि अधिग्रहण पर ज्वाइंट कमेटी अपनी रिपोर्ट 3 अगस्त तक सौंप सकती है और इस बात की उम्मीद है कि कई अहम बदलाव किए गए हैं।
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