विज्ञापन
This Article is From Sep 03, 2020

हाईकोर्ट ने कहा, 'रेप मूलभूत अधिकार का उल्‍लंघन', ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा

हाईकोर्ट ने पीडि़ता के बयान पर भरोसा करते हुए निचली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है, और आरोपी नसीरुद्दीन अली को नवंबर, 2009 में 20 वर्षीय महिला से रेप का दोषी पाया है.

हाईकोर्ट ने कहा, 'रेप मूलभूत अधिकार का उल्‍लंघन', ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा
गौहाटी हाईकोर्ट ने निचली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है
  • निचली कोर्ट ने आरोपी को सुनाई थी 9 साल की सजा
  • कोर्ट ने पीडि़ता के बयान पर भरोसा किया, सजा कायम रखी
  • 20 साल की युवती के साथ रेप का दोषी पाया गया है आरोपी
गुवाहाटी:

गौहाटी हाईकोर्ट (Gauhati High Court) ने कहा है कि रेप (Rape) किसी व्‍यक्ति के जीवन और व्‍यक्तिगत स्‍वतंत्रता (Right to life and personal liberty) के अधिकार का उल्‍लंघन है. हाईकोर्ट ने पीडि़ता के बयान पर भरोसा करते हुए निचली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है, और आरोपी नसीरुद्दीन अली को नवंबर, 2009 में 20 वर्षीय महिला से रेप का दोषी पाया है. जस्टिस रुमी कुमारी फुकन की ओर से पारित आदेश में कोर्ट ने कहा कि रेप पीडि़ता के बयान को घटना की सही विवरण के रूप में स्‍वीकार किया जा सकता है, यदि रिकॉर्ड में आए अन्‍य सबूत भी इसकी पुष्टि करते हैं.

गुरुग्राम के स्कूल में बच्चे की हत्या के आरोपी छात्र को जमानत नहीं मिली

न्यायाधीश ने कहा, "अदालतें समझती हैं कि रेप संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत पीड़िता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है और पीड़िता को घायल गवाह की तुलना में ज्‍यादा अहम समझा जाए. गौरतलब है कि 11 साल पहले 26 नवंबर की रात को तिनसुकिया जिले के डिगबोई में एक स्‍वीमिंग पूल के बाथरूम में 20 साल की महिला के साथ रेप किया गया था. यह वारदात तब हुई थी जब महिला काम करके घर वापस लौट रही थी. महिला डिगबोई में एक निजी अस्‍पताल में काम करती थी. मामले में डिगबोई पुलिस स्‍टेशन में केस दर्ज किया गया था और पुलिस ने आरोपी नसीरुद्दीन अली को गिरफ्तार किया गया था.

ट्रायल कोर्ट ने नसीर को दोषी मानते हुए उसे 9 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई थी. आदेश को नसीरुद्दीन अली के वकील ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. वकील ने दलील दी थी कि महिला ने सुनवाई के दौरान बार-बार बयान बदले हैं. राज्‍य सरकार की ओर से पेश होते हुए महिला के वकील ने इस अपील के खिलाफ दलील दी थी कि मेडिकल जांच के अनिर्णायक(inconclusive) होने के कारण महिला के बयान को सबूत के तौर पर खारिज नहीं किया जा सकता. महिला के वकील ने कहा कि यह बात स्‍थापित हो चुकी है कि आरोपी उस स्‍थान पर मौजूद था जहां अपराध हुआ है.

टेलीकॉम कंपनियों को AGR देनदारी चुकाने के लिए SC ने दिया 10 साल का वक्त

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Gauhati High Court, Rape, Right To Life And Personal Liberty
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com