
अलवर में इन दिनों तबाही का मंज़र सड़कों पर दिखने लगा है। ओला और बारिश की वजह से यहां के किसानों की सब्जियों की पूरी फसल बर्बाद हो गई। गुरुवार को खेत से मंडी पहुंचे बैंगनों को जब खरीदार नहीं मिला तो किसान निराश हो गए और मंडी के बाहर उन्हें सड़कों पर फैला दिया। दरअसल ओलों और भारी बारिश का कहर कई राज्यों के किसानों को झेलना पड़ रहा है।
उधर किसानों को मुआवजे की दरकार है जिसे ज्यादातर नेता एक सियासी मौका से ज्यादा नहीं समझते। कृषि मंत्रालय के मुताबिक बिहार में 1.86 लाख हेक्टेयर ज़मीन पर फसल प्रभावित हुई है।
केन्द्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने बिहार के मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर गुज़रिश की कि वो बिहार में आपदा प्रभावित किसानों को राज्य आपदा राहत फंड से तत्काल राहत देना शुरू करें।
लेकिन जेडी-यू ने कृषि मंत्री की इस पहल पर सवाल उठा दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव के मुताबिक राज्य आपदा राहत फंड में ज़्यादा पैसा नहीं है जबकि नुकसान का दायरा काफी बड़ा है। शरद यादव ने एनडीटीवी से कहा, 'ये चिट्ठी लिखकर कृषि मंत्री सिर्फ ज़िम्मेदारी टालने की कोशिश कर रहे हैं। केन्द्र सरकार सिवाय भाषण देने के कुछ नहीं कर रही है।'
वहीं किसानों की समस्याओं से रूबरू होने निकली कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के नीमच इलाके में प्रभावित किसानों से मुलाकात के दौरान ये भरोसा दिलाया कि वो किसानों के हक़ में जंग लड़ती रहेंगी।
सोनिया ने मुआवजे के लिए यूपी के सीएम अखिलेश को एक चिट्ठी भी लिखी है। जबकि अपनी मुंबई यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के अलग-अलग हिस्सों से आ रही किसानों की खुदकुशी की खबरों पर चिंता जताते हुए बैंकों से उनकी मदद करने की अपील की है।
अब कृषि मंत्रालय ने भी 7-8 अप्रैल को राज्यों की एक बैठक बुलाई है, जिसमें बेमौसम बारिश की वजह से हुए नुकसान का जायजा लिया जाएगा।
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