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This Article is From Jul 24, 2011

मोदी की तारीफ पड़ी महंगी, वस्तानवी हटाए गए

देवबंद में हुई एक अहम बैठक में दारुल उलूम के वाइस चांसलर गुलाम मोहम्मद वस्तानवी को पद से हटाने का फैसला लिया गया है।
देवबंद: देवबंद में मजलिस−ए−शूरा में दारुल उलूम के वाइस चांसलर गुलाम मोहम्मद वस्तानवी को पद से हटाने का फैसला लिया गया है। इस बैठक में तीन सदस्यों की टीम की रिपोर्ट पर चर्चा हुई, जिसके बाद वस्तानवी की किस्मत का फैसला किया गया। मौलाना अबुल कासिम नोमानी को नया कुलपति नियुक्त किया गया। इससे पहले वह कार्यवाहक कुलपति थे। मौलाना नोमानी ने बताया कि मजलिस-ए-शूरा ने चार के मुकाबले नौ मतों के अंतर से वस्तानवी को हटाने का फैसला किया।पद से हटाए जाने के बाद वस्तानवी ने कहा कि उनके खिलाफ साजिश हुई है। वस्तानवी ने साफ किया कि मामले की जांच कर रही तीन सदस्यों की टीम की रिपोर्ट उनके पक्ष में थी, इसलिए उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया था। इस साल 10 जनवरी को दारुल उलूम देवबंद के कुलपति बनने वाले वस्तानवी ने एक साक्षात्कार में कहा था कि गुजरात के मुसलमानों को 2002 के दंगों को भूलकर आगे बढ़ना चाहिए, हालांकि उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देने से इनकार किया था। उनके इस बयान के बाद विवाद खड़ा हुआ। बीते 23 फरवरी को शूरा ने ही इस विवादास्पद मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। इसमें मुफ्ती मंजूर अहमद (कानपुर), मुफ्ती इस्माइल (मालेगांव) और मौलाना मलिक मोहम्मद इब्राहीम (चेन्नई) शामिल थे। तीनों सदस्यों में एक राय न बन पाने की वजह से शूरा के समक्ष तीन रिपोर्ट पेश की गई थी। वस्तानवी पर फैसले को लेकर शूरा की बैठक में मौजूद 13 सदस्यों (वस्तानवी को छोड़कर) में मतभेद हो गए। आखिर में नौ सदस्यों की राय के मुताबिक वस्तानवी को हटाने का फैसला हुआ।(इनपुट भाषा से भी)
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