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This Article is From Jul 19, 2015

सरकार ने ओला, उबर से कहा, महिला सुरक्षा और वायु गुणवत्ता पर समझौता नहीं

सरकार ने ओला, उबर से कहा, महिला सुरक्षा और वायु गुणवत्ता पर समझौता नहीं
नई दिल्ली: मोबाइल ऐप के आधार पर चलने वाली टैक्सी संचालक कंपनियों उबर और ओला आदि पर नकेल कसते हुए आप सरकार ने इन कंपनियों को निर्देश दिया है कि केवल सीएनजी चालित टैक्सियां चलाई जाएं जिनमें जीपीएस लगा हो और जिनके पास राजधानी में चलाने का लाइसेंस हो।

दिल्ली की वायु गुणवत्ता और महिलाओं की सुरक्षा से समझौता नहीं करने का फैसला करते हुए अरविंद केजरीवाल सरकार ने यह भी तय किया है कि ऐप आधारित टैक्सी संचालक अगर उसके दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करते तो वह उनके खिलाफ अदालत में जाएगी।

सरकार ने तय नियमों पर ओला और उबर को पक्ष रखने का आखिरी मौका दिया है।

दिल्ली के परिवहन मंत्री गोपाल राय ने कहा, ‘‘हमने उबर, ओला कैब द्वारा दिए गए आंकड़ों का सत्यापन किया और पता चला कि उनकी 80 प्रतिशत से ज्यादा टैक्सियां डीजल से चलती हैं जिनसे दिल्ली की वायु में बहुत प्रदूषण होता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम उन्हें दिल्ली में किसी कीमत पर ऐसी टैक्सी नहीं चलाने देंगे। उबर और ओला को अपनी सभी टैक्सियों को सीएनजी से चलाना होगा। सरकार प्रदूषण के मुद्दे पर समझौता नहीं कर सकती।’’

राय ने कहा कि उबर, ओला को अपनी टैक्सियों में जीपीएस लगवाना होगा और परिवहन विभाग में पंजीकरण कराना होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘महिला सुरक्षा की दृष्टि से हमने उनसे उनकी टैक्सियों में जीपीएस लगाने और सरकार के पास पंजीकरण कराने को कहा है।’’

पिछले साल दिसंबर में उबर टैक्सी के एक ड्राइवर पर एक महिला यात्री से बलात्कार के आरोपों के बाद राष्ट्रीय राजधानी में ऐप-आधारित कैब सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में प्रतिबंध अब भी लागू है लेकिन कैब कंपनियां कथित रूप से नियम तोड़ रही हैं।

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