बेटे को नहीं बचा सकी मां, रेमडेसिविर के लिए पकड़े थे अफसर के पैर

कोरोना महामारी के चलते देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है. तमाम कोशिशों के बावजूद लोगों को ऑक्सीजन और रेमजेसिविर जैसी दवाइयां नहीं मिल पा रही है.

नई दिल्ली:

कोरोना महामारी के चलते देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है. तमाम कोशिशों के बावजूद लोगों को ऑक्सीजन और रेमजेसिविर जैसी दवाइयां नहीं मिल पा रही है. आलम ये है कि लोग डॉक्टरों को देखते ही उनके पैर पकड़ जिंदगी बचाने की गुहार लगा रहे हैं, पिछले दिनों नोएडा का एक वीडियो खासा वायरल हुआ था, जहां एक मां अपने बच्चे के लिए रेमडेसिविर की मांग के साथ CMO के पैरों में गिड़गिड़ाती हुई दिखाई दी थी. बुधवार को उसके बेटे की मौत हो गई. मरीजों के परिजनों द्वारा बार बार CMO दफ्तर के चक्कर लगाने और दवाई करने की मांग से तंग आकर उन्होंने लोगों को गिरफ्तार करवाने की धमकी भी दी थी. 


नोएडा के अलावा गाजियाबाद में इसकी किल्लत की जानकारी सामने आ रही है. गाजियाबाद में CMO दफ्तर के रेमडेसिविर के लिए लंबी लाइनें लगी हुई है. गोरखपुर में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला. गोरखपुर में जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर रेमडेसिविर इंजेक्शन लेने के लिए लोगों की लंबी लाइन लगी है. एक व्यक्ति ने बताया, ''हम लोग यहा रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए लाइन में लगे हैं। हम यहां शाम 5 बजे से लाइन में लगे हैं। हमको आज 3 बजे से दवा मिलेगा. 

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वहीं इससे पहले  दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोविड उपचार प्रोटोकॉल में परिवर्तन, आवंटित ऑक्सीजन की पूरी तरह आपूर्ति नहीं होने पर बुधवार को नाराजगी जताई थी. अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र चाहता है कि ‘‘लोग मरते रहें'' क्योंकि कोविड-19 के उपचार में रेमडेसिविर के इस्तेमाल को लेकर ‘परिवर्तित' प्रोटोकॉल के मुताबिक केवल ऑक्सीजन पर आश्रित मरीजों को ही यह दवा दी जा सकती है.