
वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ
नई दिल्ली:
वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने कहा कि तिब्बत इलाके में चीन ने बड़ी तदाद में लड़ाकू विमानों तैनात किए है. एयरचीफ ने ये बात प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी के चीन रवाना होने से ठीक पहले कही है. खास बात ये अगर चीन और पाकिस्तान के साथ मिलकर आते है तो उसका मुकाबले के लिए वायुसेना ने गगनशक्ति अभ्यास हाल ही में खत्म किया है.
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एयर चीफ मार्शल ने एक थिंक टैंक में एक संबोधन में कहा कि सभी आकस्मिक स्थितियों में अभियानों के पूर्ण संचालन के लिए लड़ाकू विमानों के 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है. मौजूदा समय में आईएएफ के पास लडाकू विमानों के केवल 31 स्क्वाड्रन हैं. उन्होंने हालांकि कहा कि जब भी जरूरत होगी तो आईएएफ में ‘तेजी ’ से युद्ध लड़ने की क्षमता है.
पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवादी संगठनों द्वारा लगातार किये जा रहे हमलों से संकेत मिलता है कि कुछ क्षेत्रों में भारतीय प्रतिरोध काम नहीं कर रहा है और उन्होंने जोर दिया कि इस क्षेत्र में क्षमताओं को बढ़ाने की जरूरत है ताकि इस्लामाबाद के रूख व्यवहारगत परिवर्तन सुनिश्चित किया जा सके.
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चीन की सीमा पर स्थिति के बारे में उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से हमने तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र में चीनी विमानों की तैनाती में महत्वपूर्ण बढोत्तरी देखी है. एयर चीफ मार्शल ने कहा कि उन्होंने हाल में चीनी वायु सेना के अधिकारी से कहा था कि दोनों पक्षों को संघर्ष से बचने के लिए अधिक बार बैठकें करनी चाहिए.
आपको बता दे कि पिछले साल डोकलाम विवाद के बाद करीब 72 दिनों तक भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने थे.
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एयर चीफ मार्शल ने एक थिंक टैंक में एक संबोधन में कहा कि सभी आकस्मिक स्थितियों में अभियानों के पूर्ण संचालन के लिए लड़ाकू विमानों के 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है. मौजूदा समय में आईएएफ के पास लडाकू विमानों के केवल 31 स्क्वाड्रन हैं. उन्होंने हालांकि कहा कि जब भी जरूरत होगी तो आईएएफ में ‘तेजी ’ से युद्ध लड़ने की क्षमता है.
पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवादी संगठनों द्वारा लगातार किये जा रहे हमलों से संकेत मिलता है कि कुछ क्षेत्रों में भारतीय प्रतिरोध काम नहीं कर रहा है और उन्होंने जोर दिया कि इस क्षेत्र में क्षमताओं को बढ़ाने की जरूरत है ताकि इस्लामाबाद के रूख व्यवहारगत परिवर्तन सुनिश्चित किया जा सके.
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चीन की सीमा पर स्थिति के बारे में उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से हमने तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र में चीनी विमानों की तैनाती में महत्वपूर्ण बढोत्तरी देखी है. एयर चीफ मार्शल ने कहा कि उन्होंने हाल में चीनी वायु सेना के अधिकारी से कहा था कि दोनों पक्षों को संघर्ष से बचने के लिए अधिक बार बैठकें करनी चाहिए.
आपको बता दे कि पिछले साल डोकलाम विवाद के बाद करीब 72 दिनों तक भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने थे.
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