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This Article is From Jul 24, 2015

कारोबार में देवी देवता की तस्वीर का इस्तेमाल करने में कोई हर्ज नहीं : सुप्रीमकोर्ट

कारोबार में देवी देवता की तस्वीर का इस्तेमाल करने में कोई हर्ज नहीं : सुप्रीमकोर्ट
सौजन्य - एएफपी
नई दिल्ली: शुक्रवार को सुप्रीमकोर्ट ने एक याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि अपने सामान को बेचने के लिए  देवी-देवताओं की तस्वीरों का इस्तेमाल करने में कोई हर्ज नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू ने कहा "33000 देवी, देवता हैं और हर कोई अपने हिसाब से उनकी कल्पना कर सकता है। हम किसी को ऐसा करने से नहीं रोक सकते।" एक याचिका में कहा गया था कि कारोबार के लिए भगवान की तस्वीर का इस्तेमाल असभ्य है इसलिए इस पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने कहा कि पूजा, खाने के सामान, मसाला,दवाई और कपड़ों पर भगवान के चित्र देखकर उन्हें बहुत गुस्सा आता था।

इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा "अगर एक व्यवसायी है जो बालाजी या लक्ष्मी जी का भक्त है और उसने अपने बच्चों के नाम भी इन्हीं पर रखे हैं। तो अगर वो इन देवताओं के चित्रों को अपनी नेम-प्लेट, या कार या किसी सामान पर इस्तेमाल करता है तो इसमें गलत क्या है?" अदालत ने कहा कि व्यवसायी को लगता होगा कि भगवान की तस्वीर से उसका सामान बिकेगा, इससे उसका धंधा चलेगा। ये तो आस्था का मामला है। हम कैसे कह सकते हैं कि उस देवता की तस्वीर अपने सामान पर नहीं लगानी चाहिए। अगर उसने अपनी चाबी पर बालाजी का चित्र लगाया है तो क्या हम उसे ऐसा करने से रोक दे?"

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