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This Article is From Jan 01, 2020

CAA पर कई राज्यों की ना-नुकुर को लेकर बोले रविशंकर प्रसाद, 'संसद से पारित कानूनों को लागू करना...'

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने बुधवार को कहा कि संसद द्वारा पारित कानूनों को लागू करना राज्य सरकारों का 'संवैधानिक कर्तव्य' है.

CAA पर कई राज्यों की ना-नुकुर को लेकर बोले रविशंकर प्रसाद, 'संसद से पारित कानूनों को लागू करना...'
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद. (फाइल फोटो)
  • नागरिकता कानून को लेकर बोले कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद
  • कहा- संसद से पारित कानूनों को लागू करना राज्यों कर्तव्य
  • कई राज्यों ने नागरिकता कानून लागू करने से किया है इनकार
नई दिल्ली:

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने बुधवार को कहा कि संसद द्वारा पारित कानूनों को लागू करना राज्य सरकारों का 'संवैधानिक कर्तव्य' है. प्रसाद ने कहा कि जो राज्य यह बात करते हैं कि वे संशोधित नागरिकता कानून (CAA) को लागू नहीं करेंगे, उन्हें उचित विधिक राय लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह आश्चर्य की बात है कि जो संविधान की शपथ लेकर सत्ता में आए हैं वे 'असंवैधानिक' बयान दे रहे हैं.

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रविशंकर प्रसाद का यह बयान केरल विधानसभा द्वारा संशोधित नागरिकता कानून को वापस लिए जाने का आग्रह करने वाले प्रस्ताव को पारित किए जाने के एक दिन बाद आया है. प्रसाद ने कहा कि जो सरकारें दावा कर रही हैं कि वे सीएए लागू नहीं होने देंगी या इसके लागू होने के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर रही हैं, वे संवैधानिक प्रावधानों को लेकर उचित विधिक राय ले सकती हैं.

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रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं से कहा, 'संसद द्वारा पारित कानूनों को लागू करना राज्यों का एक संवैधानिक कर्तव्य है.' उन्होंने कहा कि संसद नागरिकता सहित केंद्रीय सूची के तहत आने वाले विषयों पर कानून बना सकती है. उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 245 की उपधारा दो का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य संसद द्वारा पारित कानूनों का विरोध नहीं कर सकते. पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान सहित अन्य राज्यों ने कहा है कि वह संशोधित नागरिकता कानून को लागू नहीं करेंगे.

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बता दें कि केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने एक दिन पहले नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को रद्द करने की मांग करते हुए राज्य विधानसभा में मंगलवार को एक प्रस्ताव पेश किया था. प्रस्ताव को पेश करते हुए विजयन ने कहा था कि सीएए धर्मनिरपेक्ष नजरिए और देश के ताने बाने के खिलाफ है तथा इसमें नागरिकता देने में धर्म के आधार पर भेदभाव होगा. उन्होंने कहा, ‘‘यह कानून संविधान के आधारभूत मूल्यों और सिद्धांतों के विरोधाभासी है.'

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