
लखनऊ:
अपने पहले ही चुनाव में हार का स्वाद चख चुकी उत्तर प्रदेश की राजनीति में ताकतवर यादव परिवार की बहू डिम्पल यादव कन्नौज लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) की उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि सपा के दुश्मनों ने ही डिम्पल की इस उपचुनाव में जीत की राह सिम्पल कर दी है।
डिम्पल को 2009 में फिरोजाबाद संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार राज बब्बर के हाथों करारी शिकस्त मिली थी। यादव परिवार के लिए यह हार एक बड़ा झटका थी। हालांकि तब से अब तक बहुत कुछ बदल चुका है। डिम्पल के पति उस वक्त सांसद थे लेकिन आज वह इस सबसे बड़े सूबे के मुख्यमंत्री हैं।
वजह चाहे जो भी हो, डिम्पल के सामने न तो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और न भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का और न ही कांग्रेस का कोई उम्मीदवार होगा। अब उनका मुकाबला कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों से होगा जिनके बारे में कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में वे कभी भी मैदान से हट सकते हैं।
डिम्पल के खिलाफ कन्नौज उपचुनाव में उम्मीदवार न उतारने के कांग्रेस के फैसले के बाद बसपा ने बुधवार को अपना उम्मीदवार न खड़ा करने का फैसला किया। उधर, उम्मीदवार न खड़ा करने का ऐलान कर चुकी भाजपा ने नामांकन की समय सीमा समाप्त होने के कुछ घंटे पहले आनन-फानन में जगदेव सिंह यादव को डिम्पल के खिलाफ मैदान में उतारने का ऐलान किया, जो निर्धारित समय यानी तीन बजे तक नामांकन नहीं कर सके।
जगदेव ने आरोप लगाया कि स्थानीय सपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें पर्चा दाखिल करने से रोका, जिस कारण वह नामांकन नहीं कर पाए।
भाजपा, कांग्रेस और बसपा के उम्मीदवार मैदान में न होने से डिम्पल के सामने केवल दो निर्दलीय उम्मीदवार दर्शनाथ शंखवार और संजीव कटियार बचे हैं। ऐसे में डिम्पल की जीत तय मानी जा रही है।
कन्नौज सीट पर उपचुनाव के लिए 24 जून को मतदान होना है। नामांकन पत्रों की जांच गुरुवार को होगी जबकि शनिवार तक नाम वापस लिए जा सकते हैं। अगर ये दोनों निर्दलीय उम्मीदवार शनिवार को अपना नाम वापस ले लेते हैं तो डिम्पल निर्विरोध लोकसभा सदस्य चुन ली जाएंगी।
यह दूसरा मौका है जब डिम्पल सपा उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा के उपचुनाव में मैदान में हैं। इससे पहले साल 2009 में अखिलेश ने फिरोजाबाद सीट से लोकसभा की सदस्यता छोड़ दी थी और पार्टी ने यहां से डिम्पल को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन डिम्पल को कांग्रेस उम्मीदवार राज बब्बर से हार का सामना करना पड़ा था।
कन्नौज संसदीय सीट अखिलेश यादव के इस्तीफे से रिक्त हुई है। मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद अखिलेश ने कन्नौज की लोकसभा सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था।
डिम्पल को 2009 में फिरोजाबाद संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार राज बब्बर के हाथों करारी शिकस्त मिली थी। यादव परिवार के लिए यह हार एक बड़ा झटका थी। हालांकि तब से अब तक बहुत कुछ बदल चुका है। डिम्पल के पति उस वक्त सांसद थे लेकिन आज वह इस सबसे बड़े सूबे के मुख्यमंत्री हैं।
वजह चाहे जो भी हो, डिम्पल के सामने न तो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और न भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का और न ही कांग्रेस का कोई उम्मीदवार होगा। अब उनका मुकाबला कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों से होगा जिनके बारे में कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में वे कभी भी मैदान से हट सकते हैं।
डिम्पल के खिलाफ कन्नौज उपचुनाव में उम्मीदवार न उतारने के कांग्रेस के फैसले के बाद बसपा ने बुधवार को अपना उम्मीदवार न खड़ा करने का फैसला किया। उधर, उम्मीदवार न खड़ा करने का ऐलान कर चुकी भाजपा ने नामांकन की समय सीमा समाप्त होने के कुछ घंटे पहले आनन-फानन में जगदेव सिंह यादव को डिम्पल के खिलाफ मैदान में उतारने का ऐलान किया, जो निर्धारित समय यानी तीन बजे तक नामांकन नहीं कर सके।
जगदेव ने आरोप लगाया कि स्थानीय सपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें पर्चा दाखिल करने से रोका, जिस कारण वह नामांकन नहीं कर पाए।
भाजपा, कांग्रेस और बसपा के उम्मीदवार मैदान में न होने से डिम्पल के सामने केवल दो निर्दलीय उम्मीदवार दर्शनाथ शंखवार और संजीव कटियार बचे हैं। ऐसे में डिम्पल की जीत तय मानी जा रही है।
कन्नौज सीट पर उपचुनाव के लिए 24 जून को मतदान होना है। नामांकन पत्रों की जांच गुरुवार को होगी जबकि शनिवार तक नाम वापस लिए जा सकते हैं। अगर ये दोनों निर्दलीय उम्मीदवार शनिवार को अपना नाम वापस ले लेते हैं तो डिम्पल निर्विरोध लोकसभा सदस्य चुन ली जाएंगी।
यह दूसरा मौका है जब डिम्पल सपा उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा के उपचुनाव में मैदान में हैं। इससे पहले साल 2009 में अखिलेश ने फिरोजाबाद सीट से लोकसभा की सदस्यता छोड़ दी थी और पार्टी ने यहां से डिम्पल को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन डिम्पल को कांग्रेस उम्मीदवार राज बब्बर से हार का सामना करना पड़ा था।
कन्नौज संसदीय सीट अखिलेश यादव के इस्तीफे से रिक्त हुई है। मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद अखिलेश ने कन्नौज की लोकसभा सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था।
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