
नई दिल्ली:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से अपने भाषण में कहा कि यह कोई साधारण सुबह नहीं है, यह सवा सौ करोड़ देशवासियों के सपनों और संकल्पों की सुबह है। पीएम के भाषण की कुछ अहम बातें -
भारत के जन-जन में सरलता भी है और देश के कोने-कोने में एकता भी है। यही हमारे देश की शक्ति है। हर युग में उसे नया निखार देने का प्रयास हुआ है।
हमारी एकता, सरलता, भाईचारा, सद्भाव बहुत बड़ी पूंजी है। इस पर कभी दाग नहीं लगना चाहिए। अगर देश की एकता बिखर जाए तो सपने भी चूर-चूर हो जाते है।
जातिवाद का जहर हो या संप्रदायवाद का जुनून हो, किसी भी रूप में हमें इसे पनपने नहीं देना है। इन्हें विकास के अमृत से मिटाना है।
यह टीम सवा सौ करोड़ देशवासियों की वृहद टीम है। हम जहां पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं, वो सवा सौ करोड़ की टीम के कारण है। लोकतंत्र में जनभागीदारी सबसे बड़ी पूंजी होती है।
आज विकास के पिरामिड के आधार में देश का दलित, पीड़ित, उपेक्षित बैठा है।
नया कानून बनाने का खेल हमारे देश में चलता रहा। ज्यादा कानून सुशासन के लिए ठीक नहीं। गरीबों के लिए 44 कानूनों को हमने समेट दिया।
आज टीम इंडिया से कहना चाहता हूं कि सालाना 15 हजार करोड़ रुपया चोरी होता था, वह बंद हो गया। इस तरह देश से गैस सब्सिडी के नाम पर चल रहा भ्रष्टाचार चला गया।
श्रमिकों का सम्मान और गौरव हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य, स्वभाव होना चाहिए।
कोई माने या न माने, अब कोई काला धन विदेश भेजने की हिम्मत नहीं करता।
हमारी सरकार को 15 महीने हो गए, लेकिन एक नए पैसे के भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा।
भ्रष्टाचार को मिटाने के जिस काम के लिए आपने मुझे बिठाया है, मैं जुल्म और अवरोध सहता रहूंगा, लेकिन भ्रष्टाचार मुक्त सरकार देकर रहूंगा।
'वन रैंक-वन पेंशन' हमने सिद्धांतत: स्वीकार किया हुआ है। जिस प्रकार से बातचीत चल रही है, सुखद परिणाम मिलने की आशा है।
भारत के जन-जन में सरलता भी है और देश के कोने-कोने में एकता भी है। यही हमारे देश की शक्ति है। हर युग में उसे नया निखार देने का प्रयास हुआ है।
हमारी एकता, सरलता, भाईचारा, सद्भाव बहुत बड़ी पूंजी है। इस पर कभी दाग नहीं लगना चाहिए। अगर देश की एकता बिखर जाए तो सपने भी चूर-चूर हो जाते है।
जातिवाद का जहर हो या संप्रदायवाद का जुनून हो, किसी भी रूप में हमें इसे पनपने नहीं देना है। इन्हें विकास के अमृत से मिटाना है।
यह टीम सवा सौ करोड़ देशवासियों की वृहद टीम है। हम जहां पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं, वो सवा सौ करोड़ की टीम के कारण है। लोकतंत्र में जनभागीदारी सबसे बड़ी पूंजी होती है।
आज विकास के पिरामिड के आधार में देश का दलित, पीड़ित, उपेक्षित बैठा है।
नया कानून बनाने का खेल हमारे देश में चलता रहा। ज्यादा कानून सुशासन के लिए ठीक नहीं। गरीबों के लिए 44 कानूनों को हमने समेट दिया।
आज टीम इंडिया से कहना चाहता हूं कि सालाना 15 हजार करोड़ रुपया चोरी होता था, वह बंद हो गया। इस तरह देश से गैस सब्सिडी के नाम पर चल रहा भ्रष्टाचार चला गया।
श्रमिकों का सम्मान और गौरव हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य, स्वभाव होना चाहिए।
कोई माने या न माने, अब कोई काला धन विदेश भेजने की हिम्मत नहीं करता।
हमारी सरकार को 15 महीने हो गए, लेकिन एक नए पैसे के भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा।
भ्रष्टाचार को मिटाने के जिस काम के लिए आपने मुझे बिठाया है, मैं जुल्म और अवरोध सहता रहूंगा, लेकिन भ्रष्टाचार मुक्त सरकार देकर रहूंगा।
'वन रैंक-वन पेंशन' हमने सिद्धांतत: स्वीकार किया हुआ है। जिस प्रकार से बातचीत चल रही है, सुखद परिणाम मिलने की आशा है।
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