
नई दिल्ली:
नरेंद्र मोदी की एनडीए सरकार 'अपनों' के ही निशाने पर हैं। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के मंत्री रहे नेता एक-एक कर मोदी सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली के आलोचक बने हुए हैं। ताजा बयान वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी का आया है। शौरी ने एक कार्यक्रम में दो-टूक कहा कि केंद्र सरकार दिशाहीन है। यह अर्थव्यवस्था सुधारने में नहीं, बल्कि सुर्खियां बटोरने में जुटी है।
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शौरी यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि ये अब तक का सबसे कमजोर प्रधानमंत्री कार्यालय है जहां कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसे किसी तरह की विशेषज्ञता हासिल हो। मोदी की गठबंधन सरकार को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने कहा कि एनडीए की नीतियां वही कांग्रेस वाली है बस इसमें गाय और जुड़ गई है।यह पहला वाकया नहीं है जब भाजपा की विचारधारा से जुड़े किसी बड़े नेता ने सरकार की आलोचना की है। इससे पहले उनके अलावा यशवंत सिन्हा, शत्रुध्न सिन्हा, राम जेठमलानी जैसे नेता भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं। इस बीच, बीजेपी ने साफ कर दिया है कि शौरी उसके सदस्य नहीं हैं। आइए जानते हैं, अरुण शौरी के अलावा और किन नेताओं ने सरकार पर किस मसले पर सवाल उठाया....
शत्रुघ्न सिन्हा ने जनवरी में अपने परिवार के साथ नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी
बुजुर्ग नेताओं की उपेक्षा पर यशवंत का प्रहार
अटल सरकार में विदेश और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुके यशवंत सिन्हा मौजूदा सरकार को लेकर खासे मुखर हैं। वे कह चुके हैं कि मोदी सरकार बनने के बाद बीजेपी में 75 साल से ऊपर के सभी लोगों को 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया गया है। प्रधानमंत्री के 'मेक इन इंडिया' पर भी प्रहार करने से यशवंत सिन्हा नहीं चूके। उन्होंने कहा कि मोदी को पहले 'मेक इन इंडिया फर्स्ट' भारत बनाना चाहिए, बाकी सब इसके बाद हो जाएगा। खास बात यह है कि यशवंत मौजूदा वित्त राज्य मंत्री और बीजेपी सांसद जयंत सिन्हा के पिता हैं।
काले धन पर जेठमलानी लाल-पीले
लोकसभा चुनाव के पहले नरेंद्र मोदी की पीएम पद के लिए बढ़-चढ़कर पैरवी करने वाले वरिष्ठ वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम जेठमलानी के सुर अब बदल गए हैं। अपने बयानों से सुर्खियां बटोरने वाले जेठमलानी काले धन के मामले पर सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि नरेंद्र मोदी से उनका मोह मंग हो चुका है।
उन्होंने कहा कि वह विदेशों में जमा काला धन वापस लाने में सरकार पूरी तरह विफल रही है। मोदी के वित्त मंत्री अरुण जेटली की भी उन्होंने जमकर आलोचना की थी। अटल सरकार के कानून मंत्री जेठमलानी ने यहां तक कहा कि काले धन पर अपनी वादाखिलाफी के लिए मोदी को सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने इसके साथ ही बिहार चुनाव में नीतीश कुमार का समर्थन किया था।
भाजपा के 'शत्रु' बने शॉटगन
'बिहारी बाबू' और शॉटगन के नाम से लोकप्रिय शत्रुध्न इन दिनों केंद्र सरकार खासकर मोदी के खिलाफ खूब बरस रहे हैं। बिहार चुनाव के दौरान ही उन्होंने विरोधी बयानों ने भाजपा खेमे में हलचल मचा दी है। चुनावी बेला पर शत्रु के बयान बिहार चुनाव में नीतीश के नेतृत्व वाले महागठबंधन को फायदा पहुंचाते नजर आ रहे हैं। वैसे भी नीतीश कुमार से शत्रुध्न सिन्हा की नजदीकी किसी से छुपी नहीं है। लालकृष्ण आडवाणी के करीबी और अटल सरकार में मंत्री रहे शत्रुध्न सिन्हा ने नीतीश कुमार को बिहार का 'बेस्ट सीएम' बताया है।
हाल ही में एक बयान में उन्होंने कहा था कि भाजपा के स्टार प्रचारक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बिहार में रैलियों के स्थगित होने से निगेटिव संदेश जा रहा है। दाल की चढ़ती कीमतों और महंगाई के मसले पर भी वे सरकार को खरी-खरी सुना चुके हैं। सिन्हा ने भाजपा ने बिहार चुनाव में अपने स्टार प्रचारकों की सूची में भी स्थान दिया था, लेकिन उन्होंने अब तक भाजपा के पक्ष में एक भी सभा को संबोधित नहीं की है। शत्रु के इन बगावती तेवरों के कारण भाजपा में यह चर्चा आम है कि बिहार चुनाव के बाद उन पर कार्रवाई की जा सकती है।
उपेक्षा से खफा आडवाणी
अटल सरकार के उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सीधे तौर पर तो एनडीए सरकार और नरेंद्र मोदी के खिलाफ मुखर नहीं हैं, लेकिन वे इशारों-इशारों में सरकार पर निशाना साधने से नहीं चूकते। दरअसल, लोकसभा चुनाव के ऐन पहले मोदी को एनडीए का पीएम पद का दावेदार बनाए जाने से आडवाणी को खफा बताया जा रहा है।
आडवाणी के इस बयान ने मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष को 'हथियार' के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है जिसमें भाजपा के इस दिग्गज नेता ने इसी साल जून में कहा था किदेश में राजनीतिक नेतृत्व परिपक्व है, लेकिन इसमें कुछ कमियों के कारण वे आश्वस्त नहीं है कि देश में आपातकाल दोबारा नहीं लग सकता।
हालांकि विवाद बढ़ने के बाद आडवाणी ने यह साफ कर दिया था कि यह बयान किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, लेकिन विपक्ष यह आरोप लगाने से नहीं चूका कि आडवाणी को लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता एवं उत्कृष्ट नेतृत्व का अभाव दिख रहा है और यह आरोप भी कहीं न कहीं देश में मोदी सरकार के ही खिलाफ है। मुरली मनोहर जोशी जैसे वरिष्ठ नेता भी सरकार के खिलाफ खफा बताए जा रहे हैं।
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शौरी यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि ये अब तक का सबसे कमजोर प्रधानमंत्री कार्यालय है जहां कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसे किसी तरह की विशेषज्ञता हासिल हो। मोदी की गठबंधन सरकार को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने कहा कि एनडीए की नीतियां वही कांग्रेस वाली है बस इसमें गाय और जुड़ गई है।यह पहला वाकया नहीं है जब भाजपा की विचारधारा से जुड़े किसी बड़े नेता ने सरकार की आलोचना की है। इससे पहले उनके अलावा यशवंत सिन्हा, शत्रुध्न सिन्हा, राम जेठमलानी जैसे नेता भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं। इस बीच, बीजेपी ने साफ कर दिया है कि शौरी उसके सदस्य नहीं हैं। आइए जानते हैं, अरुण शौरी के अलावा और किन नेताओं ने सरकार पर किस मसले पर सवाल उठाया....

बुजुर्ग नेताओं की उपेक्षा पर यशवंत का प्रहार
अटल सरकार में विदेश और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुके यशवंत सिन्हा मौजूदा सरकार को लेकर खासे मुखर हैं। वे कह चुके हैं कि मोदी सरकार बनने के बाद बीजेपी में 75 साल से ऊपर के सभी लोगों को 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया गया है। प्रधानमंत्री के 'मेक इन इंडिया' पर भी प्रहार करने से यशवंत सिन्हा नहीं चूके। उन्होंने कहा कि मोदी को पहले 'मेक इन इंडिया फर्स्ट' भारत बनाना चाहिए, बाकी सब इसके बाद हो जाएगा। खास बात यह है कि यशवंत मौजूदा वित्त राज्य मंत्री और बीजेपी सांसद जयंत सिन्हा के पिता हैं।
काले धन पर जेठमलानी लाल-पीले
लोकसभा चुनाव के पहले नरेंद्र मोदी की पीएम पद के लिए बढ़-चढ़कर पैरवी करने वाले वरिष्ठ वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम जेठमलानी के सुर अब बदल गए हैं। अपने बयानों से सुर्खियां बटोरने वाले जेठमलानी काले धन के मामले पर सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि नरेंद्र मोदी से उनका मोह मंग हो चुका है।
उन्होंने कहा कि वह विदेशों में जमा काला धन वापस लाने में सरकार पूरी तरह विफल रही है। मोदी के वित्त मंत्री अरुण जेटली की भी उन्होंने जमकर आलोचना की थी। अटल सरकार के कानून मंत्री जेठमलानी ने यहां तक कहा कि काले धन पर अपनी वादाखिलाफी के लिए मोदी को सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने इसके साथ ही बिहार चुनाव में नीतीश कुमार का समर्थन किया था।
भाजपा के 'शत्रु' बने शॉटगन
'बिहारी बाबू' और शॉटगन के नाम से लोकप्रिय शत्रुध्न इन दिनों केंद्र सरकार खासकर मोदी के खिलाफ खूब बरस रहे हैं। बिहार चुनाव के दौरान ही उन्होंने विरोधी बयानों ने भाजपा खेमे में हलचल मचा दी है। चुनावी बेला पर शत्रु के बयान बिहार चुनाव में नीतीश के नेतृत्व वाले महागठबंधन को फायदा पहुंचाते नजर आ रहे हैं। वैसे भी नीतीश कुमार से शत्रुध्न सिन्हा की नजदीकी किसी से छुपी नहीं है। लालकृष्ण आडवाणी के करीबी और अटल सरकार में मंत्री रहे शत्रुध्न सिन्हा ने नीतीश कुमार को बिहार का 'बेस्ट सीएम' बताया है।
हाल ही में एक बयान में उन्होंने कहा था कि भाजपा के स्टार प्रचारक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बिहार में रैलियों के स्थगित होने से निगेटिव संदेश जा रहा है। दाल की चढ़ती कीमतों और महंगाई के मसले पर भी वे सरकार को खरी-खरी सुना चुके हैं। सिन्हा ने भाजपा ने बिहार चुनाव में अपने स्टार प्रचारकों की सूची में भी स्थान दिया था, लेकिन उन्होंने अब तक भाजपा के पक्ष में एक भी सभा को संबोधित नहीं की है। शत्रु के इन बगावती तेवरों के कारण भाजपा में यह चर्चा आम है कि बिहार चुनाव के बाद उन पर कार्रवाई की जा सकती है।
उपेक्षा से खफा आडवाणी
अटल सरकार के उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सीधे तौर पर तो एनडीए सरकार और नरेंद्र मोदी के खिलाफ मुखर नहीं हैं, लेकिन वे इशारों-इशारों में सरकार पर निशाना साधने से नहीं चूकते। दरअसल, लोकसभा चुनाव के ऐन पहले मोदी को एनडीए का पीएम पद का दावेदार बनाए जाने से आडवाणी को खफा बताया जा रहा है।
आडवाणी के इस बयान ने मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष को 'हथियार' के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है जिसमें भाजपा के इस दिग्गज नेता ने इसी साल जून में कहा था किदेश में राजनीतिक नेतृत्व परिपक्व है, लेकिन इसमें कुछ कमियों के कारण वे आश्वस्त नहीं है कि देश में आपातकाल दोबारा नहीं लग सकता।
हालांकि विवाद बढ़ने के बाद आडवाणी ने यह साफ कर दिया था कि यह बयान किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, लेकिन विपक्ष यह आरोप लगाने से नहीं चूका कि आडवाणी को लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता एवं उत्कृष्ट नेतृत्व का अभाव दिख रहा है और यह आरोप भी कहीं न कहीं देश में मोदी सरकार के ही खिलाफ है। मुरली मनोहर जोशी जैसे वरिष्ठ नेता भी सरकार के खिलाफ खफा बताए जा रहे हैं।
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