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This Article is From Mar 21, 2021

PB मेहता और अरविंद सुब्रमण्यम के इस्तीफे पर बोला अशोका यूनिवर्सिटी- 'जल्द दूर करेंगे खामियां' 

बयान में कहा गया है, "हम स्वीकार करते हैं कि संस्थागत प्रक्रियाओं में कुछ कमी है, जिसे हम सभी हितधारकों के परामर्श से सुधारने के लिए काम करेंगे. यह अकादमिक स्वायत्तता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करेगा जो हमेशा से अशोका यूनिवर्सिटी के केंद्रों के मूल में रहा है."

PB मेहता और अरविंद सुब्रमण्यम के इस्तीफे पर बोला अशोका यूनिवर्सिटी- 'जल्द दूर करेंगे खामियां' 
प्रताप भानु मेहता ने हाल ही में अशोका यूनिवर्सिटी छोड़ी है. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:

अभिव्यक्ति की आजादी पर हमलों के आरोपों के बीच दो शीर्ष शिक्षाविदों द्वारा यूनिवर्सिटी को छोड़ने के बाद दिल्ली-एनसीआर के सोनीपत में स्थित अशोका यूनिवर्सिटी (Ashoka University) ने स्वीकार किया है कि "संस्थागत प्रक्रियाओं में चूक" हुई है. लिबरल आर्ट्स के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध के लिए स्थापित निजी क्षेत्र के इस विश्वविद्यालय ने कहा है कि सभी "हितधारकों के परामर्श" से भूल-चूक को सुधारने के लिए काम करेंगे. यूनिवर्सिटी ने दोनों मशहूर हस्तियों के इस्तीफे पर गहरा खेद जताया है.

दो निवर्तमान संकाय सदस्यों, प्रताप भानु मेहता (Pratap Bhanu Mehta) और अरविंद सुब्रमण्यन (Arvind Subramaniam) की काबिलियत को स्वीकार करते हुए विश्वविद्यालय के शीर्ष पदाधिकारियों ने एक संयुक्त बयान में जोर देकर कहा कि उन दोनों का आज भी अशोका यूनिवर्सिटी में विश्वास इस बात पर जारी है कि यह भारतीय उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है.

बयान में कहा गया है, "हम स्वीकार करते हैं कि संस्थागत प्रक्रियाओं में कुछ कमी है, जिसे हम सभी हितधारकों के परामर्श से सुधारने के लिए काम करेंगे. यह अकादमिक स्वायत्तता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करेगा जो हमेशा से अशोका यूनिवर्सिटी के केंद्रों के मूल में रहा है."

बयान में कहा गया है, ‘‘अशोका को प्रताप भानु मेहता के तौर पर पहले कुलपति और फिर सीनियर फैकल्टी के रूप में नेतृत्व एवं मार्गदर्शन का गौरव मिला. सुब्रह्मण्यम ने विश्वविद्यालय को प्रतिष्ठा दिलाई, नए विचार और ऊर्जा दी तथा उनके जाने से एक शून्य पैदा हो गया है जिसे भरना मुश्किल होगा.''यह बयान मेहता और सुब्रह्मण्यम के साथ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, कुलपति और न्यासी मंडल के अध्यक्ष ने संयुक्त रूप से जारी किया है.

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बयान में कहा गया है, ‘‘प्रताप और अरविंद इस पर जोर देना चाहते हैं कि अशोका यूनिवर्सिटी भारतीय उच्च शिक्षा में सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है. वे अशोका खासतौर से उसके बेहतरीन छात्रों और फैकल्टी को छोड़कर दुखी हैं. उनका यह मानना है कि अशोका यूनिवर्सिटी को अकादमिक आजादी एवं स्वायत्तता के लिए एक उदार दृष्टिकोण अपनाना चाहिए.''

बता दें कि दो प्रसिद्ध बुद्धिजीवियों, प्रताप भानु मेहता और अरविंद सुब्रमण्यम  द्वारा अशोका यूनिवर्सिटी को छोड़ने पर पिछले कुछ दिनों में दुनिया भर के शिक्षाविदों ने निराशा जताई है और संस्थान में अभिव्यक्ति की आजादी के सिकुड़न पर सामूहिक रूप से चिंगारी उठी है. रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर और मशहूर अर्थशास्त्री रघुराम राजन (Raghuram Rajan) से लेकर मिलन वैष्णव और मार्था सी नुसबूम तक ने इसे  "अकादमिक स्वतंत्रता पर खतरनाक हमला" कहा है.

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RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कल कहा था, ''अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी भी महान विश्वविद्यालय की आत्मा होती है और अगर इस पर हमले होते हैं तो यह उसी आत्मा पर चोट पहुंचाना है." उन्होंने लिखा था कि क्या अशोका के संस्थापकों ने परेशान आलोचकों से छुटकारा पाने के लिए बाहरी दबाव के आगे घुटने टेक दिए हैं?
 

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Ashoka University, Pratap Bhanu Mehta, Arvind Subramanian
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