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This Article is From Jul 14, 2021

भारत में अब देश की हींग, पहली बार हिमाचल प्रदेश में शुरू हुई खेती

हींग के बीज ईरान और अफगानिस्तान से लाए गए हैं, पर अब सीएसआईआर के पालमपुर की इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायो रीसोर्स टेक्नोलॉजी लैब में खुद से हींग के पौधे भी तैयार कर रही है.

भारत में अब देश की हींग, पहली बार हिमाचल प्रदेश में शुरू हुई खेती
टिश्यू कल्चर से हींग के पौधे उगाए जा रहे हैं.
शिमला:

भारत में पहली बार हींग (Asafoetida Farming in India) की खेती शुरू हुई है. देश में अब तक हींग आयात ही होती है. पहली बार सीएसआईआर की तकनीक के दम पर ईरान-अफगानिस्तान से आयात किए गए बीज से हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग जगहों पर न सिर्फ इसकी खेती की शुरूआत हुई है बल्कि अब लैब में टिश्यू कल्चर के जरिए पौधे भी उगाए जा रहे हैं और हाइब्रिड के तौर पर नई वैरायटी भी बनाई जा रही है. हिमाचल के केलांग के पास लाहौल इलाके में हींग के पौधे लगाए गए हैं. इन पौधों से हींग की पैदावार में करीब 5 साल का वक्त लग जाता है. हिमाचल की अलग-अलग जगहों में फिलहाल 25 हजार पौधे लगाए गए हैं.

इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायो रीसोर्स टेक्नोलॉजी के निदेशक डॉक्टर संजय कुमार ने कहा, 'जलवायु की स्टडी के बाद अनेकों देश में लिखना शुरू किया कि वो हमें हींग के बीज दे सकते हैं. अक्टूबर 2017 से शुरू किया. सफल 2018 में हुए, ईरान से बीज को लाने में. इस पूरी प्रक्रिया में ICR का एक संस्थान है, नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक्स ने बड़ी मदद की परमिट देने में. हमारे 11 वैज्ञानिक इस वक्त हींग के विभिन्न पहलुओं के शोध में लगे हैं.'

हींग के बीज ईरान और अफगानिस्तान से लाए गए हैं, पर अब सीएसआईआर के पालमपुर की इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायो रीसोर्स टेक्नोलॉजी लैब में खुद से हींग के पौधे भी तैयार कर रही है.

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बता दें कि 1 पौधे में करीब 25 ग्राम हींग निकलती है. क्वालिटी के हिसाब से कीमत 5-10 हजार रुपये प्रति किलो की होती है. 1 हेक्टेयर में 10 हजार पौधे लगाए जा सकते हैं. इस साल 40 से 50 हेक्टेयर में 16 किलो बीज डालने की योजना है. हिमाचल के 135 जगहों के अलावा अब उतराखंड और लद्दाख में भी इसके पौधे लगाए गए हैं.

पालमपुर स्थित आईएचबीटी के साइंटिस्ट सनत सुजात सिंह ने कहा, 'हमारा फोकस सीड प्रोडक्शन पर है. इसके जरिए हम खुद सीड तैयार कर सकते हैं और एरिया एक्सटेंशन कर सकते हैं.'

IHBT के सीनियर साइंटिस्ट डॉक्टर अशोक कुमार कहते हैं, 'हींग के बीज में पूअर जर्मिनेशन होता है. इसको दूर करने के लिए हमने लैब में इसको जर्मिनेट करवाया और 60-70 फीसदी इसमें सफलता मिली. पौधे तैयार करने के बाद लाहौल स्पीति के अपने सेंटर पर भेजना शुरू किया.

हर साल करीब 940 करोड़ रुपये की लगभग 1500 टन कच्ची हींग अफगानिस्तान, ईरान और उजबेकिस्तान जैसे देशों से भारत को आयात करनी पड़ती है. पैदावार के दम पर कोशिश रोजगार मुहैया करवाने की भी है और हींग को लेकर देश को आत्मनिर्भर बनाने की भी.

VIDEO: देश में पहली बार हिमाचल प्रदेश में शुरू हुई हींग की खेती

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