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This Article is From Sep 07, 2016

सुनामी से निपटने के लिए कितना तैयार है भारत, जांचने के लिए शुरू हुई मॉक ड्रिल

सुनामी से निपटने के लिए कितना तैयार है भारत, जांचने के लिए शुरू हुई मॉक ड्रिल
नई दिल्ली: भारतीय तटीय इलाकों में बुधवार को शुरू हुई सबसे बड़ी सुनामी मॉक ड्रिल के लिए जौरदार तैयारियां की गई हैं, और इसके दौरान हिन्द महासागर में सचमुच बेहद बड़ी और 'जानलेवा' सुनामी पैदा की जाएंगी. यूनेस्को (UNESCO) द्वारा संयोजित और हिन्द महासागर में की जाने वाली इस मॉक ड्रिल में कुल मिलाकर 23 देश भाग ले रहे हैं.

आमतौर पर समुद्र की तलहटी में जोरदार भूकंप आने, भूस्खलन होने या कभी-कभी ज्वालामुखी फटने के कारण सुनामी आती है. इन भूगर्भीय घटनाओं की वजह से उत्सर्जित ऊर्जा लहरों की शक्ल में बहुत लंबी दूरी तय करती है, और तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाती है. भारत के अधिकतर समुद्रतटीय इलाके में सुनामी आने की आशंका हमेशा बनी रहती है, और इस तरह की मॉक ड्रिल व्यवस्था को अलर्ट रखती हैं, ताकि वास्तव में ऐसी आपात स्थिति पैदा होने पर निपटने में आसानी हो.

पहली ड्रिल बुधवार सुबह 8:30 बजे शुरू हई, जिसके तहत सुमात्रा के दक्षिण में 9.2 तीव्रता वाला भूकंप पैदा किया जा रहा है. वैसे, इस इलाके में वास्तव में भूकंप आने पर जो सुनामी आएगी, उसकी चपेट में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और चेन्नई समेत भारत का समूचा पूर्वी तट आ जाएगा.

भूकंपीय घटना को हैदराबाद स्थित अत्याधुनिक इंडियन सुनामी अर्ली वार्निंग सेंटर (भारतीय सुनामी पूर्व चेतावनी केंद्र) में दर्ज किया जाएगा, और 10 मिनट के भीतर ही सेंटर पहली चेतावनी जारी कर देगा.

चेतावनी जारी होने के बाद लगभग 40,000 लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं. इंडोनेशियाई इलाके से पैदा हुई किसी सुनामी को भारतीय तटों तक पहुंचने में आमतौर पर तीन घंटे लगते हैं, सो, लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पर्याप्त समय मिल सकता है. यह ड्रिल 15 घंटे से भी ज़्यादा चलने की संभावना है.

गुरुवार को ईरान और पाकिस्तान के दक्षिण में मकरान ट्रेंच में 9 तीव्रता वाला भूकंप पैदा किया जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप पैदा होने वाली सुनामी की चपेट में भारत का पश्चिमी तट आएगा, जिसमें मुंबई भी शामिल होगी.

सुनामी वार्निंग नेटवर्क की स्थापना वर्ष 2004 में की गई थी, जब एक भयावह सुनामी की वजह से हिन्द महासागर के इलाके में तीन लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी. वह सुनामी इंडोनेशिया में 9.3 तीव्रता वाला भूकंप आने से पैदा हुई थी.

भारत ने अपना सुनामी वार्निंग सेंटर वर्ष 2007 में स्थापित किया था, जिसमें 85 करोड़ रुपये की लागत आई थी. यह सेंटर चेतावनी जारी करने के लिए नेटवर्क से जुड़े उपग्रहों तथा गहरे समुद्र में लगाए गए तैरने वाले चिह्नों का इस्तेमाल करता है. पाकिस्ता को भी भारत ही सुनामी की पूर्व चेतावनी दिया करता है.

वर्ष 2007 से अब तक सुनामी वार्निंग सेंटर ने वास्तविक सुनामी की आठ चेतावनियां जारी की हैं, और उसके निदेशक एससी शेनॉय का कहना है, "आज तक कभी कोई गलत चेतावनी जारी नहीं की गई..." यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि पैसिफिक सुनामी वार्निंग सेंटर से अब तक कई बार गलत चेतावनियां जारी हुई हैं, जिससे इस व्यवस्था में लोगों का विश्वास कम होता जा रहा है.

एससी शेनॉय ने बताया कि भारत के कलपक्कम, कुडनकुलम और तारापुर स्थित परमाणु संयंत्र, जिन पर सुनामी का असर पड़ सकता है, इस मॉक ड्रिल में भाग नहीं लेगे.

वर्ष 2011 में जापान के फुकुशिमा में हुआ नाभिकीय हादसा एक सुनामी के परमाणु संयंत्र से टकराने की वजह से ही हुआ था, और उसके बाद से ही समुद्रतटीय इलाकों में बने आणविक संयंत्रों को लेकर विश्वभर में चिंता व्याप्त रहती है.

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