एनडीए के सहयोगी दलों को केंद्र सरकार में सम्मानजनक हिस्सा मिलना चाहिए: जेडीयू

केंद्र में कैबिनेट विस्तार की चर्चा के बीच नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी आरसीपी सिंह ने इस आशय का एक बयान दिया

एनडीए के सहयोगी दलों को केंद्र सरकार में सम्मानजनक हिस्सा मिलना चाहिए: जेडीयू

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो).

खास बातें

  • केंद्र में मोदी मंत्रिंडल के विस्तार की चर्चा
  • जेडीयू एनडीए गठबंधन में मजबूत पार्टी
  • साल 2019 में चुनाव के बाद जेडीयू की अपेक्षाएं पूरी नहीं हुईं
पटना:

बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की जनता दल यूनाइटेड, जो कि भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए का दूसरा सबसे बड़ा घटक दल है, ने शनिवार को कहा कि गठबंधन सहयोगियों का केंद्रीय मंत्रिपरिषद में "सम्मानजनक" हिस्सा होना चाहिए. इस आशय का एक बयान नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी आरसीपी सिंह ने केंद्र में कैबिनेट विस्तार पर चर्चा के बीच दिया. सिंह ने कुमार के बाद जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में तब पदभार संभाला था जब मुख्यमंत्री ने इस साल की शुरुआत में अपने कार्यकाल की समाप्ति से बहुत पहले पार्टी का शीर्ष पद छोड़ दिया था.

एक सवाल के जवाब में आरसीपी सिंह ने पत्रकारों से कहा, "हम एनडीए का हिस्सा हैं. सभी घटक (नरेंद्र मोदी सरकार में) सम्मानजनक हिस्सेदारी के हकदार हैं."

यह पूछे जाने पर कि क्या जेडीयू, जिसके लोकसभा में 16 सांसद हैं, केंद्रीय मंत्रिमंडल के अपेक्षित विस्तार में अपने लिए एक सम्मानजनक हिस्सेदारी की "मांग" करेगा? राज्यसभा में पार्टी के नेता सिंह ने चुटकी ली, "कहां है मांग का सवाल? यह समझने की बात है. इसे स्वाभाविक होना चाहिए."

केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों के बीच जेडीयू प्रमुख का यह बयान आया है. शिवसेना 18 सांसदों के साथ बीजेपी के बाद सबसे मजबूत पार्टी के रूप में एनडीए में थी. उसके एनडीए से बाहर निकलने के बाद जेडीयू संसद में बीजेपी की सबसे बड़ी सहयोगी बन गई है. जेडीयू के राज्यसभा में पांच सांसद हैं.

विशेष रूप से साल 2019 में प्रचंड बहुमत के साथ एनडीए के सत्ता में लौटने के बाद अटकलें तेज थीं कि पार्टी नई सरकार में शामिल होगी.

हालांकि नीतीश कुमार ने अपने पैर पीछे खींच लिए. वे बीजेपी के इस दावे से नाखुश थे कि चूंकि उसने अपने दम पर बहुमत हासिल किया था, इसलिए गठबंधन के सहयोगियों को एक-एक सदस्य के "टोकन" प्रतिनिधित्व से संतुष्ट होना होगा.


हालांकि, हाल के दिनों में बीजेपी की जमीन कमजोर होती दिखाई दे रही है. उसे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा है. बीजेपी को अपने सबसे पुराने सहयोगियों में से एक शिरोमणि अकाली दल को भी खोना पड़ा. यह अलगाव कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के प्रदर्शन को लेकर हुआ.

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जेडीयू, लोजपा के वर्तमान युवा अध्यक्ष चिराग पासवान के प्रति बीजेपी द्वारा दिखाई गई दुविधा से खफा हैं. चिराग ने सीएम नीतीश कुमार का बिहार में जमकर विरोध किया. इससे पिछले साल बिहार विधानसभा चुनावों में जेडीयू को बहुत क्षति पहुंची थी.