
अरविंद केजरीवाल की फाइल तस्वीर
नई दिल्ली:
अफ़सरों की नियुक्ति और तबादले में उप राज्यपाल को सर्वेसर्वा बताने वाले केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन पर रणनीति तैयार करने के लिए दिल्ली सरकार ने 26-27 मई को विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है।
विशेष सत्र से पहले केजरीवाल के घर पर रविवार को 'आप' विधायकों की बैठक बुलाई गई, जिसमें तय किया गया कि विधानसभा में प्रस्ताव रखा जाएगा कि गृहमंत्रालय ने जो नोटिफिकेशन जारी किया है, उस पर फ़ैसला लेने के लिए सदन में चर्चा हो।
शनिवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में दिल्ली कैबिनेट की बैठक में विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया गया। वैसे विधानसभा का सत्र बजट पारित करने के लिए जून में आयोजित किया जाना था।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा, 'मशहूर संविधान विशेषज्ञ केके वेणुगोपाल और पूर्व सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम की कानूनी राय मंत्रिमंडल के सामने रखी गई और उस पर बैठक में चर्चा हुई।'
कैबिनेट ने यह निर्णय भी लिया कि जरूरत के हिसाब से सत्र का कार्यकाल बढ़ाया भी जा सकता है। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को जारी एक अधिसूचना में केंद्र ने नौकरशाहों की नियुक्ति में उप राज्यपाल को पूर्ण शक्ति प्रदान की और स्पष्ट किया कि पुलिस एवं जन व्यवस्था जैसे विषयों पर उन्हें मुख्यमंत्री से परामर्श करने की कोई जरूरत नहीं है।
दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को भी केंद्र सरकार के अधिकारियों एवं राजनीतिक पदाधिकारियों के खिलाफ कोई मामला दर्ज करने से रोक दिया गया है। अधिसूचना जारी होने के बाद केजरीवाल ने केंद्र पर करारा हमला बोला था और उस पर पिछले दरवाजे से दिल्ली को चलाने और भ्रष्ट लोगों की रक्षा के लिए उपराज्यपाल के पक्ष में खड़ा होकर शहर के लोगों की पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया था।
विशेष सत्र से पहले केजरीवाल के घर पर रविवार को 'आप' विधायकों की बैठक बुलाई गई, जिसमें तय किया गया कि विधानसभा में प्रस्ताव रखा जाएगा कि गृहमंत्रालय ने जो नोटिफिकेशन जारी किया है, उस पर फ़ैसला लेने के लिए सदन में चर्चा हो।
शनिवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में दिल्ली कैबिनेट की बैठक में विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया गया। वैसे विधानसभा का सत्र बजट पारित करने के लिए जून में आयोजित किया जाना था।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा, 'मशहूर संविधान विशेषज्ञ केके वेणुगोपाल और पूर्व सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम की कानूनी राय मंत्रिमंडल के सामने रखी गई और उस पर बैठक में चर्चा हुई।'
कैबिनेट ने यह निर्णय भी लिया कि जरूरत के हिसाब से सत्र का कार्यकाल बढ़ाया भी जा सकता है। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को जारी एक अधिसूचना में केंद्र ने नौकरशाहों की नियुक्ति में उप राज्यपाल को पूर्ण शक्ति प्रदान की और स्पष्ट किया कि पुलिस एवं जन व्यवस्था जैसे विषयों पर उन्हें मुख्यमंत्री से परामर्श करने की कोई जरूरत नहीं है।
दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को भी केंद्र सरकार के अधिकारियों एवं राजनीतिक पदाधिकारियों के खिलाफ कोई मामला दर्ज करने से रोक दिया गया है। अधिसूचना जारी होने के बाद केजरीवाल ने केंद्र पर करारा हमला बोला था और उस पर पिछले दरवाजे से दिल्ली को चलाने और भ्रष्ट लोगों की रक्षा के लिए उपराज्यपाल के पक्ष में खड़ा होकर शहर के लोगों की पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया था।
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