पश्चिम बंगाल के हिंसाग्रस्त जिले में नेताओं के प्रवेश पर 3 दिन की पाबंदी लगाई गई

चुनाव आयोग ने बंगाल के कूचबिहार जिले में हिंसा के दौरान 4 लोगों के मारे जाने के बाद यह कदम उठाया है. चुनाव के दिन हिंसा को लेकर तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग भी छिड़ गई है.

पश्चिम बंगाल के हिंसाग्रस्त जिले में नेताओं के प्रवेश पर 3 दिन की पाबंदी लगाई गई

West Bengal Assembly poll Violence :पश्चिम बंगाल के हिंसाग्रस्त जिले में नेताओं के प्रवेश पर 3 दिन की पाबंदी लगाई गई है. चुनाव आयोग (Election Commission) ने बंगाल के कूचबिहार (Cooch Behar) जिले में हिंसा के दौरान 4 लोगों के मारे जाने के बाद यह कदम उठाया है. चुनाव के दिन हिंसा को लेकर तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग भी छिड़ गई है.मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee ) ने घोषणा की थी कि वो रविवार को हिंसा प्रभावित इलाके का दौरा करेंगी. जबकि तृणमल कांग्रेस ने इस घटना के विरोध में काली पट्टी बांधकर विरोध करने का फैसला किया था.

पश्चिम बंगाल में अगले चरण की वोटिंग के लिए साइलेंस पीरियड भी बढ़ाकर 72 घंटे कर दिया गया है. दरअसल, कूचबिहार जिले की सितालकुची विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ पर स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर सुरक्षाबलों पर हमला किया था. चुनाव आयोग का कहना है कि सुरक्षाकर्मियों ने आत्मरक्षा में गोलियां चलाईं, जिसमें चार लोग मारे गए. 

टीएमसी (Trinamool Congress) नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि ममता को कूचबिहार जिले में जाने से रोककर चुनाव आय़ोग ने अपने आपको स्वयं आरोपों में घेर लिया है. ममता बनर्जी अभी भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं और यह उनकी जिम्मेदारी है कि वह इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद घटनास्थल का दौरा करें. एक बात निश्चित है कि चुनाव आयोग अब निष्पक्ष नहीं रह गया है. 

कूचबिहार के सितालकुची सीट के एक मतदान केंद्र पर शनिवार को सुबह करीब 11 बजे बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई थी. रिपोर्ट्स के अनुसार झड़प में दोनों तरफ से बम और गोलियों का इस्तेमाल हुआ. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सीआईएसएफ की तरफ से फायरिंग की गई. जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई.

चुनाव आयोग का कहना है कि यह हिंसा गलतफहमी के कारण हुई है. सुबह जब सुरक्षा बल सितालकुची में मतदान केंद्र 126 के पास एक बीमार लड़के की मदद करने की कोशिश कर रहे थे, तब कुछ स्थानीय लोगों ने सोचा कि लड़के को सीआईएसएफ वाले उसे पीट रहे हैं. वहां 300-350 ग्रामीण जमा हो गए और उतेजित भीड़ ने मतदान केंद्र पर घातक हथियारों के साथ हमला कर दिया.

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भीड़ ने सुरक्षाबलों पर भी हमला कर दिया और उनके हथियारों को भी छीनने की कोशिश की.  आयोग ने कहा कि, बचाव में सुरक्षाकर्मियों ने पहले हवा में फायरिंग की लेकिन उससे भीड़ पीछे नहीं हटी तो अंत में ईवीएम और अन्य मतदान सामग्री की सुरक्षा और अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षाबलों को फायरिंग करना पड़ा. फायरिंग में जिन लोगों को गोली लगी, उनमें से चार लोगों की मौत हो गई.