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This Article is From Sep 12, 2025

भारत में ऑर्गन डोनेशन को लेकर क्या है कानून और प्रक्रिया? जानें कौन से अंगों को किया जा सकता है डोनेट

भारत में ऑर्गन डोनेशन से जुड़े नियम Transplantation of Human Organs and Tissues Act, 1994 के तहत आते हैं.

भारत में ऑर्गन डोनेशन को लेकर क्या है कानून और प्रक्रिया? जानें कौन से अंगों को किया जा सकता है डोनेट
कोई भी व्यक्ति अपनी जिंदगी में बॉडी या ऑर्गन डोनेशन का संकल्प कर सकता है.

भारत में ऑर्गन डोनेशन को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल रहते हैं. सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि मौत के बाद अगर कोई शख्स अपना शरीर या अंग दान करता है तो उसके साथ आगे क्या होता है. कानून क्या कहता है और मेडिकल साइंस में इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है? भारत में ऑर्गन डोनेशन से जुड़े नियम Transplantation of Human Organs and Tissues Act, 1994 के तहत आते हैं. इस कानून के हिसाब से कोई भी व्यक्ति अपनी जिंदगी में बॉडी या ऑर्गन डोनेशन का संकल्प कर सकता है. इस फॉर्म में दो गवाहों के सिग्नेचर जरूरी होते हैं. अगर व्यक्ति ने पहले से संकल्प नहीं लिया है तो मौत के बाद उसके परिवार वाले भी बॉडी या ऑर्गन डोनेट करने का फैसला ले सकते हैं.

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मौत के बाद बॉडी के साथ क्या होता है?

डेथ के बाद शरीर जल्दी डिकम्पोज होना शुरू कर देता है. इसलिए मेडिकल इंस्टीट्यूट उसे सुरक्षित करने के लिए एम्बाल्मिंग प्रोसेस करते हैं. इसमें फॉर्मेलिन नाम के केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि बॉडी खराब न हो और ज्यादा समय तक रिसर्च या पढ़ाई के काम आ सके. इसके बाद मेडिकल स्टूडेंट्स और डॉक्टर रिसर्च के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं. कई बार पूरा शरीर वापस परिवार को दे दिया जाता है और कभी रिसर्च खत्म होने के बाद अस्थियां परिजनों को सौंपी जाती हैं.

कौन-कौन से ऑर्गन डोनेट हो सकते हैं और उनकी टाइम लिमिट क्या है

दिल (Heart): मौत के करीब 4 घंटे के भीतर डोनेट किया जा सकता है.
फेफड़े (Lungs): 4 से 6 घंटे तक.
आंत (Intestines): करीब 6 घंटे तक.
लिवर (Liver): लगभग 24 घंटे तक.
किडनी (Kidney): 72 घंटे तक.
कॉर्निया (Cornea): 14 दिन तक.
हड्डियां और स्किन (Bones & Skin): 5 साल तक स्टोर की जा सकती हैं.
दिल के वाल्व (Heart Valves): करीब 10 साल तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं.

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क्यों जरूरी है ऑर्गन डोनेशन?

भारत में हर साल लाखों मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, लेकिन ऑर्गन की कमी की वजह से उनको समय पर मदद नहीं मिल पाती. ऐसे में ऑर्गन डोनेशन किसी की जिंदगी बचा सकता है और इंसान के जाने के बाद भी उसकी बॉडी लोगों के काम आ सकती है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

लेखक के बारे में
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अवधेश पैन्यूली
Senior Sub Editor
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