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World Environment Day 2026: ‘नेचर डिफिसिट’ का शिकार हैं? आपको दवा नहीं, हरियाली की जरूरत है

Nature Deficit Disorder: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग नेचर से दूर होते जा रहे हैं. लंबे समय तक घर के अंदर रहना और स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताना मानसिक, शारीरिक और इमोश्नल समस्याओं का कारण बन सकता है, जिसे नेचर डेफिसिट डिसऑर्डर कहा जाता है.

World Environment Day 2026: ‘नेचर डिफिसिट’ का शिकार हैं? आपको दवा नहीं, हरियाली की जरूरत है
Nature Deficit Disorder
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Nature Deficit Disorder: हममें से बहुत से लोग ऐसे हैं जो आजकल अपना ज्यादातर समय घर के अंदर बैठकर टीवी, लैपटॉप या फोन चलाते हुए बिताते हैं. आज के समय में वर्क फ्रॉम होम काफी ज्यादा कॉमन हो गया है. इससे कहीं ना कहीं लोगों और नेचर के बीच का रिलेशन खत्म हो रहा है. अपने बिजी लाइफस्टाइल में लोगों के पास इतना समय ही नहीं है कि वह कुछ समय नेचर में बैठकर बिताएं. क्या नेचर में समय कम बिताने का हमारे शरीर में कोई असर पड़ता है? इसका जवाब है हां. आज हम आपको नेचर डेफिसिट के बारे में बताने जा रहे हैं. इसके बाद आपके लिए फैसला करना काफी आसान हो जाएगा कि क्या आपके लिए नेचर में समय बिताना जरूरी है या नहीं.

नेचर डेफिसिट डिसऑर्डर क्या है?

नेचर डेफिसिट डिसऑर्डर कोई मेंटल या मेडिकल डिसऑर्डर नहीं है. दरअसल यह नेचर से अलगाव को दिखाता है. नेचर डेफिसिट डिसऑर्डर की अवधारणा रिचर्ड लूव ने अपनी 2005 की किताब "Last Child in the Woods: Saving Our Children from Nature Deficit Disorder" में पेश की थी. नेचर डेफिसिट डिसऑर्डर के लिए किसी डॉक्टर को दिखाने की जरूरत नहीं होती ना ही इसके लिए कोई दवा होती है. लेकिन इसकी वजह से व्यक्ति को ध्यान केंद्रित करने और शारीरिक और इमोशनल समस्याओं आदि का सामना करना पड़ता है. इंसान खासकर बच्चे पहले की तुलना में बाहर कम समय बिता रहे हैं, इसलिए यह कई तरह की मानसिक और शारीरिक समस्याओं, जैसे 'अटेंशन डेफिसिट डिसऑर्डर' (ADHD) और मोटापे का कारण बन रहा है.

अमेरिका के Centers for Disease Control and Prevention (CDC) के अनुसार, यदि ADHD का इलाज न किया जाए, तो व्यक्ति को जीवन के महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे परिवार और दोस्तों के साथ संबंध, पढ़ाई और नौकरी में प्रदर्शन जैसी चीजों में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. 

अमेरिका के एनसीबीआई (NCBI) पर उपलब्ध A Potential Natural Treatment for Attention-Deficit के अनुसार, हरे-भरे या प्राकृतिक परिवेश में समय बिताने वाले बच्चों में एडीएचडी (Attention-Deficit/Hyperactivity Disorder) के लक्षण काफी हद तक कम हो जाते हैं.

डेनमार्क के ओरहूस विश्वविद्यालय (Aarhus University) और iPSYCH द्वारा किए गए इस बड़े अध्ययन में पाया गया कि बचपन के शुरुआती 5 वर्षों में हरियाली के बीच समय बिताने वाले बच्चों में ADHD (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) का जोखिम काफी कम होता है. शोधकर्ताओं ने 8 लाख से अधिक बच्चों के डेटा का विश्लेषण किया.

नेचर डेफिसिट डिसऑर्डर के संकेत

नेचर डेफिसिट डिसऑर्डर कोई मेडिकल कंडीशन नहीं है. हालांकि डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स इस बात से सहमत हैं कि नेचर में समय बिताने से  सेहत को कई तरह के फायदे मिलते हैं.

ये हैं नेचर डेफिसिट डिसऑर्डर के कुछ संकेत-

- एंग्जाइटी
- बर्ताव से संबंधित समस्याएं
- सेहत पर बुरा असर पड़ना
- स्ट्रेस का लेवल बढ़ना
- मोटापा
- पढ़ाई में खराब परफॉर्मेंस
- रोजाना के कामों में फोकस ना कर पाना
- विटामिन डी की कमी

बच्चों में 'नेचर डेफिसिट डिसऑर्डर' के कारण

नेचर डेफिसिट डिसऑर्डर (NDD) तब होता है जब बच्चे नेचर और खुले माहौल में कम समय बिताते हैं और ज्यादा समय मोबाइल, टीवी, टैबलेट या स्क्रीन पर सामने बिताते हैं. इसके कारण बच्चों का ध्यान जल्दी भटक सकता है, उनकी सोचने और समस्या सुलझाने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है. साथ ही मोटापा, स्ट्रेस और इमोशनल दिक्कतें भी बढ़ सकती हैं.

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