Budget 2026 For Health: महंगाई के दौर में अगर किसी चीज का सबसे ज्यादा असर आम आदमी पर पड़ता है, तो वह है इलाज का खर्च. कैंसर, डायबिटीज (शुगर) और अन्य गंभीर बीमारियों की दवाएं अक्सर इतनी महंगी होती हैं कि मरीज और उनके परिवार पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है. इसी बड़ी चिंता को ध्यान में रखते हुए बजट 2026 में सरकार ने एक अहम और राहत भरा फैसला लिया है. संसद में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि 17 जरूरी दवाओं के आयात पर छूट (इंपोर्ट ड्यूटी में राहत) दी जाएगी. इस कदम से इन दवाओं की कीमतें कम होंगी और मरीजों को सीधा फायदा मिलेगा.
क्या है बजट 2026 की यह घोषणा?
वित्त मंत्री ने कहा कि कैंसर, शुगर और अन्य गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली कुछ खास दवाएं फिलहाल आयात की जाती हैं. इन पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी के कारण इनकी कीमत काफी बढ़ जाती है. अब सरकार ने 17 ऐसी दवाओं को चिन्हित किया है, जिनके आयात पर टैक्स में छूट दी जाएगी, ताकि ये दवाएं आम लोगों की पहुंच में आ सकें.
कौन-सी बीमारियों की दवाएं होंगी सस्ती?
इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा कैंसर और डायबिटीज के मरीजों को मिलेगा. इसके अलावा कुछ दुर्लभ और गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली एडवांस दवाएं भी इस लिस्ट में शामिल हैं. ये वे दवाएं हैं जिनका देश में सीमित उत्पादन होता है या जो पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं.
किन बीमारियों के मरीजों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
इस फैसले का सबसे बड़ा असर कैंसर और डायबिटीज़ (शुगर) के इलाज पर पड़ेगा. कैंसर की कई दवाएं बेहद महंगी होती हैं और लंबे समय तक चलती हैं. वहीं, शुगर एक ऐसी बीमारी है जिसमें मरीज को जीवनभर दवाओं की जरूरत पड़ती है. इन दोनों ही मामलों में दवाओं के सस्ता होने से इलाज का कुल खर्च काफी कम हो जाएगा. इसके अलावा कुछ दुर्लभ और गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली एडवांस दवाएं भी इस सूची में शामिल हैं.

मरीजों और परिवारों को क्या लाभ होगा?
इंपोर्ट ड्यूटी में छूट मिलने से दवाओं की कीमत सीधे तौर पर घटेगी. इससे मरीजों का इलाज सस्ता होगा, लंबे समय तक चलने वाले इलाज का आर्थिक बोझ कम होगा, गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को राहत मिलेगी, गंभीर बीमारियों का इलाज बीच में छोड़ने की मजबूरी घटेगी.
अब कितना सस्ता होगा इलाज?
हालांकि सरकार ने अभी हर दवा की नई कीमत अलग-अलग तौर पर घोषित नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इंपोर्ट ड्यूटी हटने से 10 से 30 प्रतिशत तक कीमतों में कमी आ सकती है. इससे मरीजों पर आर्थिक बोझ घटेगा, इलाज बीच में छोड़ने की मजबूरी कम होगी, मध्यम और गरीब वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी
स्वास्थ्य नीति की दिशा में बड़ा कदम
यह फैसला दिखाता है कि सरकार अब सिर्फ इलाज की सुविधाओं पर ही नहीं, बल्कि इलाज की लागत पर भी ध्यान दे रही है. सस्ती दवाएं उपलब्ध कराना यूनिवर्सल हेल्थकेयर की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है.
बजट 2026 में 17 जरूरी दवाओं के आयात पर छूट का फैसला करोड़ों मरीजों के लिए राहत की सांस जैसा है. कैंसर और शुगर जैसी बीमारियों के इलाज को सस्ता बनाकर सरकार ने यह साफ संदेश दिया है कि स्वास्थ्य अब सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि प्राथमिकता है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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