विज्ञापन

Surrogacy in India: भारत में सरोगेसी के नियम क्या हैं? कौन बन सकता है पैरेंट, क्या है कानून और कितना आता है खर्च?

भारत में अब सेरोगेसी के लिए सख्त नियम लागू हैं. 2025 तक सिर्फ परोपकारी सेरोगेसी की ही इजाजत है. इसका मतलब है कि सेरोगेट मां को कोई पैसा नहीं दिया जा सकता, सिर्फ इलाज और इंश्योरेंस का खर्च उठाया जाता है. कमर्शियल सेरोगेसी पूरी तरह बंद है. केवल शादीशुदा भारतीय कपल, NRI और OCI कार्ड होल्डर ही तय शर्तों के साथ सरोगेसी करा सकते हैं.

Surrogacy in India: भारत में सरोगेसी के नियम क्या हैं? कौन बन सकता है पैरेंट, क्या है कानून और कितना आता है खर्च?
भारत में सरोगेसी के लिए क्या हैं नियम?

Surrogacy Law In India: मां बनना एक सौभाग्य की बात कहा जाता है. एक नई जिंदगी को दुनिया में लाना एक औरत के लिए नए जन्म की तरह होता है. बच्चे ना होने पर महिलाओं को ताने और समाज की बातें सुननी पड़ती थी. लेकिन साइंस ने आज के समय में इतनी प्रगति कर ली है जिसकी मदद से कई लोगों को मां-बाप बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है. IVF से लेकर सरोगेसी तक कई उपाय है जिनकी मदद लेकर के बच्चे को जन्म दिया जा सकता है. लेकिन हाल ही में मध्य प्रदेश के इंदौर से IVF और सरोगेसी के नाम पर एक महिला से दुष्कर्म और नवजात बच्चे के अपहरण का मामला सामने आया है. इंदौर के खजराना एरिया में रहने वाले कपल ने बताया कि कैसे एक नामी डॉक्टर ने सरोगेसी के नाम पर झांसा दिया और फिर अपने साथियों के साथ मिलकर सरोगेसी से बच्चा हासिल करने के लिए ऐसा जाल बिछाया कि महिला 8 महीने तक कैमरों की निगरानी में बंधक बनी रही. यही नहीं, डॉक्टर ने सरोगेसी के नाम पर ब्लैकमेल कर महिला से दुष्कर्म किया और बच्चा होने पर छीनकर भाग गया. इस मामले की जांच चल रही है. चलिए जानते हैं कि भारत में सरोगेसी को लेकर के क्या नियम हैं?

सरोगेसी को लेकर भारत में हुए हैं बदलाव

भारत में सरोगेसी को लेकर पिछले कुछ सालों में बड़े बदलाव हुए हैं. अब इस प्रोसेस में सख्त कानून लागू किए गए हैं ताकि किसी भी महिला का शोषण न हो और पूरी व्यवस्था ट्रांसपैरेंट रहे. साल 2025 में भी भारत में सिर्फ परोपकारी (Altruistic Surrogacy) की ही परमिशन है. इसका मतलब है कि सरोगेट मां को कोई कमर्शियल भुगतान नहीं दिया जा सकता, सिर्फ मेडिकल खर्च और इंश्योरेंस कवर किया जाता है. यह कानून उन कपल्स के लिए उम्मीद की किरण है जो मेडिकल कारणों से माता-पिता नहीं बन पा रहे हैं, लेकिन साथ ही महिलाओं की सेफ्टी को भी प्रायरॉयरिटी देता है.

सरोगेसी क्या है? (What is surrogacy?)

सेरोगेसी एक ऐसा मेडिकल प्रोसेस है जिसमें एक महिला किसी कपल के लिए गर्भ धारण करती है और बच्चे को जन्म देती है. आमतौर पर वे कपल, जो मेडिकल कारणों से गर्भधारण नहीं कर पाते, इस ऑप्शन का सहारा लेते हैं.

सेरोगेसी के प्रकार (Types of Surrogacy)

ये भी पढ़ें: 25–29 साल की उम्र में मां बनना क्यों माना जाता है सबसे सुरक्षित? रिपोर्ट ने खोले राज

सेरोगेसी अलग-अलग तरह से की जाती है, लेकिन भारत में हर तरीका मान्य नहीं है. आइए जानते हैं सेरोगेसी कितने प्रकार की होती है-

जेस्टेशनल सेरोगेसी

यह भारत में कानूनी रूप से मान्य है. इसमें IVF की मदद से एम्ब्रियो तैयार किया जाता है. एम्ब्रियो इच्छुक माता-पिता या डोनर के एग और स्पर्म से बनता है. सेरोगेट महिला सिर्फ बच्चे को गर्भ में रखती है; उसका बच्चे से कोई खून या जीन का रिश्ता नहीं होता. यही तरीका आज सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है.

ट्रेडिशनल सेरोगेसी

इसमें सेरोगेट महिला के अपने एग का इस्तेमाल होता है. यानी वह बच्चे की बायोलॉजिकल मां भी होती है. पहले यह तरीका अपनाया जाता था, लेकिन इससे कई कानूनी और इमोश्नल दिक्कतें हुईं. अब भारत में यह तरीका मान्य नहीं है.

कमर्शियल सेरोगेसी

इसमें सेरोगेट को पैसे दिए जाते हैं. भारत में यह पूरी तरह बैन है. सरकार ने महिलाओं के शोषण को रोकने के लिए इसे बंद कर दिया है.

परोपकारी सेरोगेसी

भारत में अभी सिर्फ यही तरीका मान्य है. इसमें सेरोगेट को कोई पैसा नहीं दिया जाता. सिर्फ मेडिकल, लीगल और इंश्योरेंस का खर्च उठाया जाता है.

कौन लोग सरोगेसी का ऑप्शन चुन सकते हैं? (Who Can Opt for Surrogacy in India)

कानून के अनुसार, सिर्फ भारतीय शादीशुदा हेट्रोसेक्सुअल कपल, NRI और OCI कार्डधारक ही सेरोगेसी करा सकते हैं. शादी को कम से कम पांच साल पूरे होने चाहिए और मेडिकल इनफर्टिलिटी का प्रमाण होना जरूरी है. महिला की उम्र 23 से 50 साल और पुरुष की उम्र 26 से 55 साल के बीच होनी चाहिए. सिंगल पेरेंट, लिव-इन कपल, सेम-सेक्स कपल और विदेशी नागरिक इस प्रोसेस के लिए इलेजिबल नहीं हैं.

सरोगेट मां के लिए रूल्स और अधिकार (What are the rights of surrogate mothers in India?)

सरोगेट मां शादीशुदा होनी चाहिए, उसकी उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच हो और उसका कम से कम एक बच्चा हो. वह जीवन में केवल एक बार ही सरोगेट बन सकती है. सरोगेसी के लिए महिला को लिखित सहमति देनी होती है और एम्ब्रियो ट्रांसफर से पहले महिला को पीछे हटने का पूरा अधिकार भी होता है. पूरी गर्भावस्था के दौरान मेडिकल सुविधा और डिलीवरी के बाद 36 महीने तक इंश्योरेंस कवर दिया जाता है.

लीगल प्रोसेस और खर्च (Surrogacy Cost in India)

सेरोगेसी के लिए सरकारी रजिस्टर्ड क्लिनिक से मेडिकल सर्टिफिकेट लेना जरूरी है. इसके बाद स्टेट या जिला स्तर के बोर्ड से अनुमति लेनी होती है. भारत में सरोगेसी का कुल खर्च लगभग 20 से 30 लाख रुपए तक हो सकता है, जिसमें IVF, मेडिकल केयर, लीगल फीस और डिलीवरी खर्च शामिल हैं.

क्या विदेशियों के लिए सरोगेसी लीगल है? (Is surrogacy legal in India for foreigners?)

नहीं. नए नियमों के तहत विदेशी नागरिक भारत में सरोगेसी नहीं कर सकते. यह कदम सरकार की ओर से महिलाओं के शोषण को रोकने के लिए उठाया गया है.

सेरोगेसी के लिए भारत में क्या है लीगल प्रोसेस? (What is the legal procedure for surrogacy in India?)

Latest and Breaking News on NDTV

भारतीय कपल के लिए

  • सरकारी रजिस्टर्ड क्लिनिक से इनफर्टिलिटी  सर्टिफिकेट
  • आधार, पैन, मैरिज सर्टिफिकेट जमा करना
  • स्टेट या डिस्ट्रिक्ट सरोगेसी बोर्ड में आवेदन
  • Certificate of Essentiality और Eligibility लेना
  • नोटराइज्ड कानूनी एग्रीमेंट

NRI और OCI कपल के लिए

  • वैलिड पासपोर्ट और OCI/NRI प्रमाण
  • भारत में 12 महीने रहने का प्रमाण
  • भारतीय क्लिनिक से मेडिकल सर्टिफिकेट
  • बोर्ड से अप्रूवल
  • बच्चे के जन्म के बाद बर्थ सर्टिफिकेट, FRRO क्लीयरेंस और पासपोर्ट प्रोसेस पूरा करना होता है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com