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अंतरिक्ष में शुक्राणु भूल जाते हैं रास्ता! मंगल पर जीवन बसाना आसान नहीं, स्टडी में खुलासा

हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों की एक स्टडी ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिससे पता चलता है कि अंतरिक्ष में शुक्राणु (Sperm) अपना रास्ता ही भूल सकते हैं.

अंतरिक्ष में शुक्राणु भूल जाते हैं रास्ता! मंगल पर जीवन बसाना आसान नहीं, स्टडी में खुलासा
Sperm in Space: इस प्रयोग में पाया गया कि शुक्राणु अंतरिक्ष में दिशा खो देते हैं.

आज विज्ञान उस मुकाम पर पहुंच चुका है जहां इंसान सिर्फ धरती तक सीमित नहीं रहना चाहता. चांद और मंगल पर बसने की योजनाएं अब कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत बनने की ओर बढ़ रही हैं. NASA का Artemis मिशन और SpaceX जैसी कंपनियों की एंबिसंस इस दिशा में तेजी ला रही हैं. लेकिन, एक बड़ा सवाल अभी भी सामने है क्या इंसान अंतरिक्ष में प्रजनन कर पाएगा? हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों की एक स्टडी ने इस सवाल पर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिससे पता चलता है कि अंतरिक्ष में शुक्राणु (Sperm) अपना रास्ता ही भूल सकते हैं.

क्या कहती है नई रिसर्च?

ऑस्ट्रेलिया की एडिलेड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने माइक्रोग्रैविटी (यानि लगभग शून्य गुरुत्वाकर्षण) में शुक्राणुओं के व्यवहार का अध्ययन किया. उन्होंने एक खास मशीन क्लिनोस्टेट का इस्तेमाल किया, जो अंतरिक्ष जैसी स्थिति पैदा करती है.

इस प्रयोग में पाया गया कि शुक्राणु अंतरिक्ष में दिशा खो देते हैं. वे उलटे-सीधे घूमते रहते हैं, जैसे कोई अंतरिक्ष यात्री हवा में तैर रहा हो, उन्हें यह समझ ही नहीं आता कि ऊपर-नीचे क्या है.

रास्ता क्यों भूल जाते हैं शुक्राणु?

धरती पर गुरुत्वाकर्षण एक दिशा तय करता है, जिससे शुक्राणु अंडाणु (Egg) तक पहुंच पाते हैं. लेकिन, अंतरिक्ष में यह दिशा ही गायब हो जाती है.

वैज्ञानिकों ने एक भूलभुलैया बनाई जो महिला प्रजनन तंत्र जैसा था. इसमें देखा गया, माइक्रोग्रैविटी में लगभग 40% कम शुक्राणु सही रास्ते तक पहुंच पाए, यानी fertilisation (निषेचन) की संभावना घट जाती है.

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क्या फिर भी संभव है स्पेस में प्रजनन?

दिलचस्प बात यह है कि कुछ मामलों में स्वस्थ भ्रूण (embryos) फिर भी बने. इसका मतलब है कि पूरी तरह असंभव नहीं, लेकिन चुनौतीपूर्ण जरूर है. वैज्ञानिकों ने पाया कि प्रोजेस्टेरोन हार्मोन (जो अंडाणु छोड़ता है) शुक्राणुओं को दिशा देने में मदद कर सकता है.

अंतरिक्ष में और कौन सी चुनौतियां हैं?

सिर्फ माइक्रोग्रैविटी ही नहीं, बल्कि रेडिएशन (Radiation) भी शुक्राणुओं को नुकसान पहुंचा सकता है. लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है.

इतिहास में भी ऐसे संकेत मिले हैं कि 1987 में स्पेस में गए चूहों में प्रजनन अंग कमजोर पाए गए. 2018 में NASA ने मानव शुक्राणु पर भी प्रयोग किए.

भविष्य के लिए क्यों जरूरी है यह रिसर्च?

अगर इंसान को मंगल या चांद पर बसना है, तो सिर्फ वहां पहुंचना ही काफी नहीं, वहां जीवन को बनाए रखना भी जरूरी है. इसके लिए प्रजनन की प्रक्रिया को समझना बेहद अहम है. इंसानों और जानवरों दोनों के लिए यह जरूरी है.

यह रिसर्च दिखाती है कि अंतरिक्ष में जीवन बसाना उतना आसान नहीं जितना फिल्मों में दिखाया जाता है. शुक्राणुओं का रास्ता भटक जाना एक छोटी लेकिन अहम चुनौती है. फिर भी, वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि सही तकनीक और रिसर्च के जरिए भविष्य में अंतरिक्ष में भी प्रजनन संभव हो सकता है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

लेखक के बारे में
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अवधेश पैन्यूली
Senior Sub Editor
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