Rabies: रेबीज की बीमारी के बारे में तो आप सबने सुना ही होगा, कई केस भी देखे होंगे जिसमें कुत्ते के काटने से रेबीज जैसी भयानक बीमारी हो जाती है. आपको बता दें कि ये रेबीज बीमारी 4000 साल से भी ज्यादा सालों पुरानी है. रेबीज एक ऐसा वायरस है जो जानवरों के काटने से इंसान में फैलता है. जो जानवर रेबीज से पीड़ित होता है और वो किसी इंसान को काट ले तो वो रेबीज के शिकार हो जाते हैं. अगर आपको लगता है कि रेबीज सिर्फ कुत्ते के काटने से होता है तो आपकी सोच बिल्कुल गलत है.
रेबीज एक ऐसा वायरस है जो हर जानवर में पाया जाता है. यहां तक कि अगर बिल्ली और गाय भी इस वायरस से संक्रमित हैं तो इनके काटने से भी रेबीज का खतरा होता है. इंफेक्टेड जानवरों की लार से यह इंसानों में फैलता है. रेबीज वायरस आमतौर पर काटने यानी बाइटिंग (Dog Bite) से फैलता है. संयुक्त राज्य अमेरिका में जिन जानवरों के काटने से रेबीज फैलने की सबसे अधिक आशंका है उनमें चमगादड़, कोयोट, लोमड़ी, रैकून और स्कंक शामिल हैं. भारत जैसे विकासशील देशों में खासकर आवारा कुत्तों के काटने से लोगों में रेबीज फैलने की सबसे अधिक आशंका होती है. वहीं आपको बता दें कि रेबीज गाय और बिल्ली के काटने से भी रेबीज जैसी बीमारी होती है.
रेबीज के लक्षण (Symptoms Of Rabies)

रेबीज के पहले लक्षण फ्लू की तरह हो सकते हैं और कई दिनों तक बने रह सकते हैं. उसके बाद के लक्षणों में शामिल हो सकते हैं -
- बुखार
- सिरदर्द
- जी मिचलाना
- उल्टी करना
- घबराहट
- चिंता
- भ्रम
- सक्रियता
- निगलने में कठिनाई
- अत्यधिक लार आना
- पानी निगलने में कठिनाई के कारण कुछ भी तरल पदार्थ पीने से डर
- चेहरे पर हवा के झोंके से डर का अहसास
- बुरे और डरावने सपने
- नींद की कमी
- आंशिक लकवा
किन जानवरों के काटने से होता है रेबीज

- बिल्ली
- गाय
- कुत्ते
- फेरेट्स
- बकरी
- घोड़े
- चमगादड़
- बीवर
- काइओट
- लोमड़ी
- बंदर
- रैकून
- पशुफार्म
- वुडचुक्स
जानवर के काटने पर क्या करें
बता दें कि किसी भी जानवर के काटने पर आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए और उपचार लेना चाहिए. जानवर के काटने पर लगाए गए टीके से इस वायरस को रोका जा सकता है. लेकिन अगर एक बार रेबीज के लक्षण दिखने लगते हैं तो इसका कोई भी इलाज नहीं हो पाता है. इसलिए समय का ध्यान रखें और बिना लापरवाही किए डॉक्टरी सलाह जरूर लें.
रेबीज का अब तक कोई पक्का इलाज क्यो नहीं
रेबीज का अब तक कोई पक्का इलाज इसलिए नहीं मिला है क्योंकि ये वायरस सीधे तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क पर हमला करता है, जहाँ दवाइयों का पहुँचना बेहद मुश्किल होता है. लक्षण दिखने के बाद यह लगभग 100% तक घातक है. हालांकि, काटने के तुरंत बाद लगने वाला टीका और इम्यूनोग्लोबुलिन (Rabies Immunoglobulin) इसके सबसे प्रभावी बचाव हैं.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं