
Home Remedies For Constipation: आयुर्वेद के क्षेत्र में प्रेमानंद महाराज के घरेलू नुस्खे किसी चमत्कार से कम नहीं हैं. खासकर कब्ज और पेट की समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए उनका सुझाया गया मंत्र बेहद प्रभावी है. अक्सर हमारी खराब लाइफस्टाइल और खानपान में गड़बड़ी के कारण पेट में गंदगी जमा होती रहती है, लेकिन पेट साफ न होने से ये कब्ज की स्थिति में बदल जाती है. कई दिनों तक पेट साफ न होना न सिर्फ पाचन को प्रभावित करता है बल्कि मानसिक रूप से परेशान करने वाला होता है.
कब्ज के लिए घरेलू उपाय कारगर साबित हो सकते हैं, जो इस समस्या से जल्दी राहत दिला सकते हैं. कब्ज होने पर किसी काम में मन नहीं लगता है, इसीलिए प्रेमानंद महाराज ने भक्ति और नामजप करने वाले लोगों को पेट साफ रखने के कारगर तरीके बताए हैं ताकि मन में भटकाउ न हो. साथ ही मानसिक और शारीरिक रूप से भी आप केंद्रित रहें. महाराज जी के इस रामबाण उपाय से आपका पेट साफ रहेगा और पेट के कोने-कोने से गंदगी बाहर निकल जाएगी.
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कब्ज क्यों बनती है?
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, कब्ज मुख्य रूप से गलत जीवनशैली और असंतुलित खानपान का परिणाम है. इसके कई कारण हो सकते हैं:
फाइबर की कमी: डाइट में फाइबर की कमी पाचन तंत्र को धीमा कर देती है, जिससे मल त्याग में दिक्कत होती है.
पानी की कमी: पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने से शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है और आंतों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है.
ज्यादा तला-भुना और मसालेदार खाना: इस तरह के भोजन का अत्यधिक सेवन पाचन तंत्र को कमजोर कर देता है.
फिजिकल एक्टिविटी की कमी: ज्यादातर समय बैठे रहने और व्यायाम न करने से पेट की मांसपेशियां सक्रिय नहीं रहतीं, जिससे कब्ज की समस्या होती है.
तनाव और खराब रूटीन: मानसिक तनाव और सोने-जागने के असमय के कारण पाचन तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ता है.
बहुत ज्यादा खाना: बहुत ज्यादा मात्रा में खाना भी कब्ज, एसिडिटी का कारण बनता है.
सादा भोजन क्यों करना चाहिए?
महाराज का मानना है कि सादा भोजन शरीर और मन, दोनों को स्वस्थ बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाता है.
पाचन तंत्र को राहत: सादा और हल्का भोजन आसानी से पचता है, जिससे पेट पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता.
शरीर को डिटॉक्स करता है: सादा भोजन शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है और आंतरिक अंगों को साफ रखता है.
बीमारियों से बचाव: सादे खाने में पोषक तत्व ज्यादा होते हैं और यह शरीर को बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है.
मन को शांति: संतुलित और सादा भोजन मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है और ध्यान में सहायक होता है.
लंबे समय तक हेल्दी लाइफ: सादा भोजन शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा और स्वस्थ जीवन जीने की क्षमता प्रदान करता है.
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प्रेमानंद महाराज के टिप्स: कब्ज और पाचन सुधारने के उपाय
सादा भोजन खाएं: रोजाना कम तेल-मसाले और पौष्टिक खाने को प्राथमिकता दें.
पानी पिएं: पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, खासकर सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुना पानी.
फाइबरयुक्त वाली चीजें लें: ताजे फल, सब्जियां और दलिया जैसी चीजें कब्ज को दूर करने में सहायक हैं.
व्यायाम करें: रोजाना योग और हल्का व्यायाम करें, खासतौर पर प्राणायाम और कपालभाति.
तनाव से बचें: ध्यान और मेडिटेशन से मानसिक शांति प्राप्त करें.
प्रेमानंद महाराज का कब्ज से छुटकारा पाने का खास नुस्खा
महाराज जी ने बताया पेट को साफ रखना बहुत ही आसान है अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखें. ये प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक और सरल है. इसके लिए आपको चाहिए:
- त्रिफला चूर्ण - 1 चम्मच
- गुनगुना पानी - 1 गिलास
- शहद - 1 चम्मच
कैसे करें इस्तेमाल?
- रात को सोने से पहले त्रिफला चूर्ण को गुनगुने पानी में मिलाएं.
- अगर जरूरत हो तो इसमें शहद मिलाकर इसे पिएं.
- नियमित रूप से इसका सेवन कब्ज को जड़ से खत्म कर सकता है.
इस नुस्खे के फायदे
पेट की सफाई: यह मिश्रण पेट की गहराई से सफाई करता है और आंतों में जमा गंदगी को बाहर निकालता है.
पाचन सुधार: त्रिफला चूर्ण और गुनगुना पानी पाचन शक्ति को बेहतर बनाता है और गैस, एसिडिटी जैसी समस्याओं को दूर करता है.
डिटॉक्सिफिकेशन: यह शरीर को अंदर से डिटॉक्स करता है, जिससे त्वचा पर भी सकारात्मक प्रभाव दिखता है.
प्राकृतिक उपाय: यह पूरी तरह से आयुर्वेदिक है और इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है.
मेटाबॉलिज्म में सुधार: नियमित सेवन से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है, जो वेट मैनेजमेंट में भी मददगार साबित होता है.
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ये सावधानियां जरूर बरतें
- ज्याद मात्रा में त्रिफला चूर्ण का सेवन न करें.
- गर्भवती महिलाएं और बच्चों को इसका उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.
- अगर किसी को पहले से कोई मेडिकल कंडीशन है, तो भी डॉक्टर से सलाह जरूर लें.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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